प्राइमरी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा मजाक बन गई है। सोमवार को परिषदीय स्कूलों में बच्चों ने नकल का खेल खेला। खास बात यह है कि नकल के सूत्रधार बच्चों के सुनहरे भविष्य के निर्माता गुरूजी रहे। कई स्कूलों में प्रश्न पत्र ही नहीं बांटे गए। जहां बांटे वहां शिक्षकों ने ब्लैक बोर्ड पर नकल करवा शिक्षा व्यवस्था का बंटाधार कर दिया। बच्चों के भविष्य से किस हद तक मजाक किया गया। इसका खुलासा सोमवार को अमर उजाला टीम ने किया। स्कूलों में मौजूद अध्यापकों ने बात करने से ही इनकार कर दिया।
प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र में बच्चे 10 बजे किताब से नकल कर रहे थे। कुछ बच्चों को पेपर ही नहीं मिला। नकल शिक्षिका की मौजूदगी में हो रही थी।
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प्राथमिक विद्यालय ऊपरकोट नगर क्षेत्र में बच्चे समूह में नकल कर रहे थे। कक्ष में टीचर कुर्सी पर आराम से बैठी थीं। हालांकि, फोटो खींचता देख शिक्षिका ने बच्चों को लाइन में बैठने की हिदायत जरूर दी। प्राथमिक विद्यालय चौधरियान नंबर एक और दो में बच्चे नकल करते मिले।
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नयागांव स्थित प्राथमिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 10.30 बजे बच्चे समूह मेें नकल कर रहे थे। परीक्षा कक्ष में कुछ बच्चे खेलकूद में मशगूल थे। यहां कुछ बच्चों को प्रशभनपत्र वितरित नहीं किया गया। परीक्षा सामग्री भी नहीं थी।
प्राथमिक विद्यालय हीरापुर में ब्लैकबोर्ड पर अध्यापिका प्रश्नों केे जवाब लिखकर बच्चों को नकल करवा रही थी। हालांकि फोटो खींचने पर शिक्षिका ने ब्लैकबोर्ड से कई उत्तर मिटा भी दिए।
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दूसरी कक्षाओं के भी हुए पेपर
कक्षा पांच और आठवीं की बोर्ड परीक्षा के साथ दूसरी कक्षाओं की भी परीक्षा हुई। इन कक्षाओं के बच्चे भी झुंड बनाकर और किताबों से नकल करते हुए मिले। कुल मिलाकर परीक्षा नकल पर आधारित रही। नकल के संबंध में जब टीचरों से नाम पूछे गए तो उन्होेंने बताने से इनकार कर दिया।
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सुबह प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका लेकर पहुंचे टीचर
परीक्षा करवाने में विभागीय की लापरवाही यह रही कि टीचर बीआरसी और एनपीआरसी से प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका सोमवार की सुबह लेकर स्कूल पहुंचे। टीचरों का तर्क था कि रविवार होने के कारण परीक्षा सामग्री समय पर नहीं पहुंच पाई।
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परीक्षा में नकल करवाने और टीचरों द्वारा अनियमितताएं बरतने की शिकायत मिल चुकी हैं। इस संबंध में एबीआरसी और परीक्षा से संबंधित अफसरों से जवाब मांग लिया है। जहां भी नकल हुई है वहां के टीचरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे विद्यालयों को चिन्हित करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।