संकट : आठ लाख बच्चों पर सिर्फ चार बाल रोग विशेषज्ञ
बुलंदशहर। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए जनपद में भी तैयरियां जोर शोर से शुरू कर दी गई हैं। जनपद के लाखों बच्चों के स्वास्थ्य का दारोमदार सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चार बाल रोग विशेषज्ञों के कंधे पर है। शून्य से 14 साल तक के करीब आठ लाख बच्चों के उपचार का जिम्मा इन्हीं चार डॉक्टरों पर है। प्रदेश के दो स्थानों पर लखनऊ और नोएडा में बाल रोग विशेषज्ञ को तीन दिवसीय प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है। जनपद के दो बाल रोग विशेषज्ञ प्रशिक्षण ले चुके है और जल्द ही जनपद के चिकित्सक और स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित करेंगे।
चिकित्सा व्यवस्था पर एक नजर
जनपद में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 58 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व पांच अर्बन सीएचसी है। यहां प्रतिदिन नाममात्र मरीज ही पहुंचते हैं। जबकि, जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, जटिया चिकित्सालय खुर्जा और संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद संचालित हैं। यहां पर प्रतिदिन मरीजों की संख्या 200 से अधिक रहती है। लेकिन जिला अस्पताल में एक, जिला महिला अस्पताल में दो और जटिया चिकित्सालय में एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे में तीसरी लहर के दौरान सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य विभाग को बाल रोग विशेषज्ञ की कमी खलेगी। साथ ही महामारी से बच्चों को बचाने के लिए विभाग के पास संसाधनों की भी कमी चल रही है।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 16 बेड आरक्षित
बाल रोग विशेषज्ञ एवं नोडल अधिकारी डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि इमरजेंसी पड़ने के लिए जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 16 बेड ऑक्सीजन के रखवा दिए गए हैं। इसके अलावा बच्चों को संक्रमण के दौरान इलाज करने के लिए शासन स्तर से सामान भेजा जा रहा है।
बच्चों में ये हो सकते हैं लक्षण
कोरोना की चपेट में आने के बाद बच्चों में लक्षण सामने आ सकते हैं। इसमें बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी, थकावट, सूंघने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द आदि हो सकता हैं। कुछ में मल्टी सिस्टम इफ्लामेट्री सिंड्रोम हो सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को बुखार 100 डिग्री से अधिक हो सकता है।
शून्य से 10 तक 592 हो चुके संक्रमित
मार्च 2020 से आठ जून 2021 तक जनपद में 592 बच्चे शून्य से 10 वर्ष तक के संक्रमित मिल चुके हैं।
- पहली लहर के दौरान मार्च 2020 से मार्च 2021 तक 220
- एक अप्रैल से आठ जून तक 372 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं।
- इनमें 52 बच्चे ऐसे भी शामिल हैं, जिनकी उम्र तीन वर्ष से कम रही। साथ ही एक बच्चे की मौत भी हो गई।
इन अस्पतालों में रहेंगे बेड
जटिया चिकित्सालय खुर्जा 40 बेड
वीआईआईटी 20 बेड
सिकंदराबाद 10 बेड
स्याना 10 बेड
डिबाई 10 बेड
यह की जाएगी व्यवस्था
- हर बेड पर बच्चे के साथ एक तीमारदार रहेगा।
- अस्पताल के किचन में बच्चों की उम्र के हिसाब से खाना बनेगा।
- वेंटिलेटर और बाईपेप के बजाय हाई फ्लो नेजर कैनुला (एचएफएनसी) पर जोर।
जिले में लगेंगे नौ ऑक्सीजन प्लांट, दो हो चुके शुरू
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि वीआईआईटी कॉलेज और खुर्जा के जटिया अस्पताल में 45 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट शुरू कर दिया गया है। जबकि राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर की निधि से सिकंदराबाद में 300 एलपीएम, सदर विधायक ऊषा सिरोही की निधि से जिला अस्पताल में, एनएपीपी के सहयोग से डिबाई अस्पताल में, टीएचडीसी के सहयोग से खुर्जा में, शुगर मिल के सहयोग से जबकि दो प्लांट अन्य समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से लगाने की तैयारी की जा रही है।
शासन ने प्रत्येक जनपद में 40 बेड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा 50 बेड चार अन्य अस्पतालों में आरक्षित किए गए हैं। जरूरत के हिसाब से बदलाव किया जा सकता हैं। साथ ही जनपद में बाल रोग विशेषज्ञ की काफी कमी है। लेकिन किसी भी महामारी से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह से तैयार है। बच्चों से संबंधित पर्याप्त दवाएं अस्पतालों को मुहैया कराई जाएगी।
डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ