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1.29 लाख मुकदमों में बढ़ गया इंसाफ का इंतजार

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1.29 लाख मुकदमों में बढ़ गया इंसाफ का इंतजार
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बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में न्यायिक कार्य बाधित हो गए हैं। बुलंदशहर, खुर्जा और अनूपशहर के न्यायालयों में करीब 1.29 लाख मुकदमे इंसाफ के इंतजार में हैं।
कोरोना संक्रमण और कर्फ्यू के कारण सभी न्यायालयों में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित है। केवल अपर सत्र न्यायाधीश रिमांड/जमानत प्रार्थना पत्र एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संवर्ग के न्यायालय खुले हुए हैं। दोनों न्यायालयों में आवश्यक पुलिस रिमांड व जमानत पर प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के कार्य ही हो रहा है। जनपद में सेशन न्यायालय, परिवार न्यायालय, क्रिमिनल न्यायाल, सिविल न्यायालय एवं पॉक्सो न्यायालय, गैंगस्टर न्यायालय, एनडीपीएस न्यायालय, किशोर न्यायालय में करीब 1.29 लाख मामले विचाराधीन हैं। इन सभी मामलों में सिर्फ अगली तारीखें ही मिल रही हैं।
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हाईकोर्ट के निर्देशों पर ही वर्चुअल सुनवाई
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई वर्चुअल की जा रही है। हाईकोर्ट के ही निर्देश पर न्यायालय में लंबित अन्य सभी प्रकार के वादों में न्यायिक कंट्रोल रूम द्वारा आनलाइन व पूर्व निर्धारित तारीखें हाईकोर्ट द्वारा प्रदान की जा रही हैं।
जनपद में न्यायालय
80 अदालत हैं जिले में
27 सेशन कोर्ट
49 मजिस्ट्रेट न्यायालय
4 परिवार न्यायालय
इन चर्चित मामलों में भी नहीं हो पा रही सुनवाई
पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड
चिंगरावठी हिंसा कांड (स्याना बवाल)
पूर्व विधायक हाजी अलीम मौत प्रकरण
संजय प्रधान हत्याकांड
26 अधिवक्ता, 5 कर्मचारियों की हो चुकी है मौत
कोरोना की दूसरी लहर में अब तक 26 अधिवक्ता जान गंवा चुके हैं। जबकि, पांच कर्मचारी भी कोरोना के कारण काल के गाल में समा गए हैं। बार पदाधिकारियों ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश बार कौंसिल को भी पत्र भेजकर उचित व्यवस्थाएं कराए जाने की मांग की है।
दाखिल नहीं हो पा रही चार्जशीट
कोरोना कर्फ्यू के कारण सभी न्यायालयों में कार्य बंद हैं। इसके कारण जनपद पुलिस के द्वारा विभिन्न मामलों में तैयार की गईं चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल नहीं हो पा रही हैं।
बोले अधिवक्ता
कोरोना कर्फ्यू के कारण न्यायिक कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। इससे वादकारियों को भी परेशानी हो रही है।हाल के दिनों में अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की मौत चिंता का सबब है। विभिन्न न्यायालयों में करीब 1.29 लाख मामले विचाराधीन हैं। - गजेंद्र सिंह रघुवंशी, अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन
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कोरोना संक्रमण के कारण लागू कर्फ्यू और न्यायिक कार्य बंद होने से अधिवक्ताओं को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। खासतौर पर मुंशियों के सामने भी संकट बढ़ा है। इस संबंध में आला अफसरों से भी पत्राचार किया गया है। - संजय दीक्षित, अध्यक्ष सिविल बार एसोसिएशन
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