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नैथला गांव में दम तोड़ रहे लोग, स्वास्थ्य टीम का पता नहीं

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नैथला गांव में दम तोड़ रहे लोग, स्वास्थ्य टीम का पता नहीं
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बुलंदशहर। शहर से करीब पांच किमी दूर जेवर रोड पर बसा गांव नैथला यूं तो काफी समृद्ध गांव माना जाता है, लेकिन पिछले एक महीने में इस गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव में एक महीने में 17 लोगों की मौत बुखार-जुकाम, खांसी से हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांव में तीन लोगों की कोविड से मौत की पुष्टि कर रहे हैं। खास बात यह है कि इतनी मौतों के बाद भी गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम न तो कैंप लगा रही है और न ही जांच के लिए कोई अभियान चला रही है। लगातार हो रही मौतों से गांव के लोग डरे हुए हैं और प्रशासन ने गांव में टेस्टिंग कैंप लगाने और बीमार लोगों को समुचित उपचार की मांग कर रहे हैं। लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। गांव की आबादी पांच हजार से अधिक होने के बाद भी यहां केवल 100 लोगों की ही कोविड जांच हो सकी है। जबकि वैक्सीनेशन के लिए ग्रामीण कैंप लगाए जाने की मांग कर रहे हैं।
पांच हजार से अधिक आबादी वाले नैथला को जिले के संपन्न गांवों में गिना जाता है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की यहां सेवाएं प्राप्त करने के लिए लोगों को जिला अस्पताल का ही रुख करना पड़ता है। गांव से करीब दो किमी दूर सुनहरा गांव में वैक्सीनेशन केंद्र बनाया गया है, लेकिन यहां भी जाकर ग्रामीण वैक्सीनेशन नहीं करा पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक तीन लोगों की मौत कोविड से हुई है, जबकि 14 लोगों को बुखार के बाद सांस लेने में परेशानी समेत अन्य बीमारियों के कारण मौत हुई है।
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नहीं लगा स्वास्थ्य शिविर
गांव में लोगों की कोविड जांच के लिए कैंप नहीं लगाए जा रहे हैं। जिससे पर्याप्त संख्या में लोगों की कोविड जांच नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग को गांव में शिविर लगाते हुए जांच व वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
नारायण वशिष्ठ
वैक्सीनेशन की नहीं मिल रही सुविधा
वैक्सीन लगवाने के लिए इस गांव में कोई सुविधा नहीं है। दूसरे गांव में जाने के कारण बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन नहीं लगवा पा रहे हैं। वैक्सीन को लेकर भ्रांतियों के कारण भी लोग असमंजस में हैं। स्वास्थ्य विभाग को शिविर लगाने चाहिए।
राकेश कांत शर्मा
सात किलोमीटर दूर हैं अस्पताल
गांव से करीब सात किमी की दूरी पर जिला अस्पताल के अलावा उपचार के लिए ग्रामीणों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं है। जांच कराने के लिए भी जिला अस्पताल में जाना पड़ता है।
द्विजेंद्र कौशिक
इन लोगों की हुई है मौत
बुद्धसेन
मोहित शर्मा
विनीता
कुसुम
सुरेश
लक्ष्मी शर्मा
मुन्नी
जगदीश
राजवती
मुनेश
इंदा
तेजपाल
रामवती
सोमवती
सुनीता
आनंद
दुलारी
जिला मुख्यालय पर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए 50 लाख रुपये विधायक निधि से देने के लिए डीएम को पत्र लिखा है। गांवों में कैंप लगाकर वैक्सीनेशन और टेस्टिंग के लिए भी अधिकारियों से बात की जा रहीं है। महामारी के दौर में प्रत्येक व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार का मुख्य उद्देश्य है।
ऊषा सिरोही, सदर विधायक
महामारी से बचाव के लिए गांव को सैनिटाइज कराया जा रहा है। लोगों में वैक्सीनेशन को लेकर कुछ भ्रम है तो वहीं कोविड जांच कराने से भी लोग डरते हैं। अभी तक केवल 100 लोगों की ही जांच हो सकी है। विभाग से मांग की है कि गांव में कैंप लगाकर वैक्सीनेशन करने के साथ ही कोविड जांच भी कराई जाए।
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प्रियांश कौशिक, ग्राम प्रधान
गांव के लोगों को उपचार कराने के लिए आना पड़ता है जिला अस्पताल
गांव में उपचार के लिए एक मात्र है आयुर्वेदिक अस्पताल
इन गांवों के हालात भी हैं खराब
गांव का नाम मौत
कुंवरपुर 07
राजौर 09
कैलावन 18
परवाना 17
कनौना 14
दौलतपुर कलाँ 18
बरहाना 07
इछावरी 14
इछावरी में शिविर लगाकर की 125 लोगों की जांच
डिबाई। क्षेत्र के गांव इछावरी में लोगों की मौत को लेकर अमर उजाला में रविवार के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पीएचसी दानपुर की टीम ने डा. नवल किशोर और डा. जितेंद्र कुमार व भूपेंद्र कौशिक के नेतृत्व में गांव में पहुंचकर लोगों की कोविड जांच की। डा. नवल किशोर के मुताबिक 125 लोगों की एंटीजन और 24 लोगों के सैंपल लेकर आरटीपीसीआर जांच के लिए भेजे हैं। बताया कि अभी तक गांव में किसी भी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है। जांच टीम ने मृतकों के परिजनों से उनकी बीमारी को लेकर बातचीत की। जिसके बाद पाया कि सभी 14 लोगों की मौत हार्ट अटैक, टीबी समेत अन्य बीमारियों के कारण हुई थी।
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