एक ओर जिले में भूजल स्तर लगातार गिर रहा रहा है, वहीं दूषित पानी लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। नगर की 15 से अधिक कालोनियों में भूजल दूषित हो चुका है। काली नदी के आसपास समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है। दूषित पानी पीने से इन कालोनियों के लोगों में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
लोगों ने प्रशासन से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। नगर के बीच से गुजर रही काली नदी प्रदूषित हो चुकी है। इसके चलते आसपास के कालोनियों के हैंडपंप भी दूषित पानी उगल रहे हैं। इन कालोनियों का पानी इसलिए दूषित हो चुका है कि काली नदी में क्लोराइड और आर्सेनिक जैसे तत्व पाए गए हैं।
काली नदी के आसपास और नगर की अन्य कालोनियों में पानी दूषित होने की बात जल निगम भी स्वीकार कर चुका है। काली नदी के आसपास ऊपर कोट, पुरानी अनाज मंडी, इस्लामाबाद, साठा, मोहन कुटी, मामन रोड, नरसल घाट, इमामबाड़ा, धमेड़ा अड्डा, अनूपशहर अड्डा, देवीपुरा, राधा नगर, गुरुस गंज, बीसा कालोनी आदि कालोनियां हैं, जहां का पानी दूषित हो चुका है।
नगर की जिन कालोनियों का पानी दूषित है, उनमें फ्लोराइड, आर्सेनिक और हार्ड करने वाले तत्व मिले हैं। शहरी और ग्रामीण इलाकों में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 33858 हैंडपंप लगे हुए हैं। इनमें से 32182 हैंडपंप चालू हालत में हैं, जबकि विगत वर्ष 1676 हैंडपंपों पर जल निगम ने लाल निशान लगाकर चेतावनी दी थी कि पानी पीने योग्य नहीं है।
काली नदी जिले में गुलावठी, अगौता, बुलंदशहर, शिकारपुर, पहासू और दानपुर ब्लॉक से होकर अलीगढ़ की सीमा में पहुंचती है। ऐसे में काली नदी के किनारे बसे 160 गांवों का पेयजल दूषित हो गया है।
इन गांवों में हृदयपुर, सांवली, शेरपुर, मुरादाबाद, समेलपुर, छतारी, पहासू, शिकारपुर, कैलावन, करैना, हुरतरा, पूठरी, भटवारा, अनोना, चांदौक, चिटटा, बरवारीपुर, याकूबपुर शामिल हैं।
आरओ का पानी पिए
चिकित्सकों के अनुसार दूषित पानी से सेहत को बचाना है तो पानी उबालकर पीए। शुद्ध पानी को आरओ का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सबमर्सिबल और गहरे भूजल स्तर का पानी इस्तेमाल करने से हानिकारक तत्वों से बचा जा सकता है।