संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। गोशाला में गाय का गोबर अब आय का जरिया बनेगा। 160 गोशालाओं में वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने की पहल शुरू हो गई है। इससे जैविक खेती को जहां बढ़ावा मिलेगा, वहीं गोशाला की आय में बढ़ोतरी होगी। इससे होने वाली आय से गायों के लिए चारा खरीदा जाएगा तो सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
जिले में 160 स्थायी और अस्थाई गोशालाएं हैं। इनमें से 17 गोशाला बड़ी हैं। इनमें करीब 17 हजार गोवंश रहते हैं। इससे प्रतिदिन 100 क्विंटल से अधिक गोबर निकलता है। उसके रख-रखाव को लेकर संचालक को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पशुपालन विभाग अब गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने में जुट गया है। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। यहां से तैयार होने वाले वर्मी कंपोस्ट को किसानों को बेचा जाएगा। इससे गोशाला की आय बढ़ेगी, साथ ही किसानों में जैविक खेती के प्रति रूझान भी बढ़ेगा। पशुपालन विभाग की माने तो केंचुए और गाय के गोबर की मदद से बनने वाली जैविक खाद (देशी खाद) फसलों के लिए लाभकारी होगी। बाजार से कम कीमत पर उसे किसानों को मुहैया कराई जाएगी। बताते चलें कि रासायनिक खाद के अधिक प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति घट रही है। जैविक खेती के लिए सरकार कई योजना चला रही है, लेकिन उम्मीद के हिसाब से गोबर न मिलने से किसान रासायनिक खाद का प्रयोग करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जिला विकास अधिकारी सुभाष नेमा और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि गोशाला में वर्मी कंपोस्ट बनने से आस-पास के किसानों को कम दाम पर देशी खाद मिल जाएगी। इस कार्य को शुरू करने के लिए गोशाला संचालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
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विभाग करेगा मदद, केंचुआ भी करवाएगा उपलब्ध
जिला विकास अधिकारी सुभाष नेमा ने कहा कि सभी गोशालाओं में गाय के गोबर से बनाए जाने वाले वर्मी कंपोस्ट के लिए विभाग मदद करेगा। साथ ही वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए केंचुआ की जरूरत होगी। केंचुआ भी सभी गोशालाओं को निशुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि वर्मी कंपोस्ट इस तरह से तैयार किया जाए, जिसे खेतों में प्रयोग करने से फसल अच्छी हो और किसानों की आय में भी इजाफा हो।