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बुलंदशहर: 40 करोड़ की लागत से बनेगी कलक्ट्रेट की बहुमंजिला इमारत

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40 करोड़ की लागत से बनेगी कलक्ट्रेट की बहुमंजिला इमारत
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बुलंदशहर। जल्द ही कलक्ट्रेट का नया भवन बनकर तैयार होगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने नक्शा तैयार कर बजट का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। यह भवन मल्टी स्टोरी होगा। तीन मंजिला भवन के अंदर जिलाधिकारी से लेकर एडीएम और अन्य अधिकारियों के कार्यालय होंगे। लोगों के वाहन खड़े करने के लिए अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नक्शे की स्वीकृति के बाद टेंडर जारी करते हुए निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। पहले चरण में आबकारी और सूचना विभाग कार्यालय के स्थान पर भवन का निर्माण किया जाएगा।
अंग्रेजों के जमाने के कलक्ट्रेट भवन को नए सिरे से बनाने के लिए पिछले पांच सालों से तैयारी चल रही है। बीच में कोविड महामारी के चलते इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था, लेकिन अब अधिकारियों ने इसके लिए नक्शा भी तैयार करा लिया है। अब अधिकारियों ने नक्शा स्वीकृति के लिए एक टीम बुलाई है। टीम से स्वीकृति मिलने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। नये सिरे से बनने वाले भवन को तीन मंजिला बनाने की योजना है। इसमें अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने के साथ ही भूतल पर अधिकारियों के कार्यालय, दूसरे और तीसरे तल पर कर्मचारियों के बैठने के लिए कार्यालय तैयार किए जाएंगे। अंडरग्राउंड पार्किंग में करीब 70 चार पहिया और 150 से अधिक दो पहिया वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की जाएगी। इस भवन के निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में और अधिक समय लगता है तो लागत घट या बढ़ सकती है।
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पार्किंग नहीं होने से होती है परेशानी
अब तक कलक्ट्रेट परिसर में पार्किंग का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। ऐसे में अधिकारियों के साथ कलक्ट्रेट आने वाले लोगों को परेशानी होती है। वाहनों के दबाव के कारण कई बार डीएम-एडीएम समेत अन्य अधिकारियों के वाहन भी फंस जाते हैं। जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस बुलाकर वाहनों को जब्त कराया जाता है। कलक्ट्रेट परिसर में ही जाम की स्थिति बन जाती है। काफी समय तक वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है। सबसे बड़ी समस्या धरना प्रदर्शन के दौरान होती है।
नई बिल्डिंग बनाने पर उठे थे सवाल
कोविड महामारी के फंड से कलक्ट्रेट परिसर में डीएम कार्यालय के पीछे कोविड भवन बनाया गया था। करीब 1.65 करोड़ रुपये का कोविड फंड का प्रयोग करके बनाए गए भवन में अधिकारियों के कार्यालय के साथ कोर्ट भी बनाए गए थे। जिसके चलते लगातार सवाल उठे थे, लेकिन डीएम की पहल पर कोई भी अधिकारी कुछ नहीं कर सका था।
1940 में पहली बार जिले में हुई थी डीएम की तैनाती
साल 1940 में अंग्रेजों ने पहली बार कलक्ट्रेट परिसर में डीएम की तैनाती की थी। इस दौरान जेएल स्टब्स को जिले का डीएम बनाया गया था, जबकि आजादी के बाद 20 अगस्त 1947 को एम लाल जिले के डीएम बनाए गए थे। अब तक कुल 65 डीएम ने जिले में कार्य किया है। सभी डीएम ने इसी कलक्ट्रेट परिसर स्थित अपने कार्यालय में बैठकर सरकारी कार्य, लोगों की समस्याएं सुनीं। हालांकि इस दौरान समय-समय पर सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाता रहा था।
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नये स्तर से कलक्ट्रेट की बिल्डिंग बनाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए नक्शा तैयार किया गया है। जल्द इसे शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। अंडरग्राउंड पार्किंग के साथ तीन मंजिला भवन बनाया जाएगा - सत्यप्रकाश, सिटी मजिस्ट्रेट
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