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Bulandshahar News: शीतलहर से ठिठकी जिंदगी, दिन में तीसरा सबसे ठंडा जिला रहा बुलंदशहर

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खुर्जा में ठंड के कारण अलाव जलाकर हाथ सेकते लोग। संवाद
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बुलंदशहर। सर्दी लगातार बढ़ती जा रही है। रविवार को शहर सुबह हल्के कोहरे, गलन व शीतलहर की चपेट में रहा। सर्द हवाएं पूरे दिन ठिठुरन का अहसास कराती रहीं। ऐसे मौसम के बीच रविवार को दिन में तीसरा सबसे ठंडा जिला रहा। अधिकतम तापमान एक डिग्री गिरकर 15 पर व न्यूनतम 0.6 डिग्री बढ़कर 7 डिग्री पर पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि इस अभी शीतलहर से निजात मिलने की उम्मीद नहीं है।
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पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्रों में लगातार बना हुआ है। बादल भी छाए हुए हैं और पिछले कई दिन से धूप भी नहीं निकल रही। सुबह-शाम हल्का कोहरे का असर और रात में पाला पड़ने से कंपकंपा देने वाली ठंड का आमजन को सामना करना पड़ रहा है। इस सर्दी का असर पशु व पक्षियों पर भी आम देखा जा रहा है। रविवार को अवकाश होने के कारण बाजार व प्रमुख मार्गों पर भी चहल-पहल कम रही। शाम होते ही लोग घरों में दुबक गए।
हवा की गति पांच किलोमीटर के आसपास रही। शनिवार को अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को मुजफ्फरनगर का सबसे कम अधिकतम तापमान 12.8 डिग्री रहा। फतेहगढ़ और आजमगढ़ का अधिकतम तापमान 14.8 और बुलंदशहर के साथ बहराइच व बलिया का अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस तरह से बुलंदशहर प्रदेश में रविवार को तीसरा सबसे ठंडा जिला रहा। कृषि विज्ञान केंद्र की अध्यक्ष एवं मौसम वैज्ञानिक डा. रेशु सिंह का कहना है कि अभी इस तरह का मौसम लगातार बना रहेगा। कंपकंपा देने वाली ठंड, शीतलहर और सुबह-शाम हल्के कोहरे से जल्द निजात नहीं मिलने वाली है। सोमवार को अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 7 डिग्री रहने का अनुमान है।
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फसलों पर पाले का खतरा बढ़ा

शीतलहर का असर खेतों में खड़ी फसलों पर भी पड़ रहा है। पाले का खतरा बढ़ गया है। किसान सुबह-सुबह खेतों में जाकर फसलों की हालत देखने पहुंच रहे हैं। सब्जी और आलू की फसल को अधिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि ठंड इसी तरह बढ़ती रही तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कई किसान फसलों को पाले से बचाने के लिए सिंचाई और धुआं करने जैसे उपाय कर रहे हैं, लेकिन ठंड की मार से चिंता बनी हुई है। जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने किसानों को फसलों पर नजर रखने के साथ बचाव के उपाय करने की बात कही है।
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