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कुपवाड़ा में दो आतंकियों को ढेर कर विशाल चौधरी ने दी शहादत

Mon, 01 Aug 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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पफाौजी
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दो आतंकियों को ढेर कर शहादत पाने वाले जनपद के लाल पर जनपदवासी गौरवांवित हैं। परिजनों ने भी अपने लाल की शहादत पर गर्व जताया है। देर शाम शहीद का पार्थिव शव गांव पहुंचा। यहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
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जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव रौंडा निवासी विशाल चौधरी पुत्र दीनदयाल चौधरी कश्मीर के नौगाम सेक्टर में तैनात था। शुक्रवार की रात नौगाम सेक्टर में तैनात जवानों ने संदिग्ध हलचल देखी। आंतकी घुसपैठ को देख विशाल और उसके साथी जवानों ने सरेंडर के लिए ललकारा। जिसके बाद आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

आंतकियों के साथ जवानों की जमकर मुठभेड़ चली। इसमें दो आतंकी ढेर हो गए , जबकि बुलंदशहर का लाल विशाल चौधरी शहीद हो गया। इसके अलावा दो जवान घायल भी हो गए। विशेष विमान से शहीद विशाल चौधरी का शव कुपवाड़ा से दिल्ली लाया गया। दिल्ली से शहीद का शव शाम करीब आठ बजे गांव पहुंचा।
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शहीद का शव आते ही गांव में भारत माता की जय और विशाल चौधरी अमर रहे के नारे लगने लगे। पूरा माहौल गर्वमय गमगीन हो गया। अपने लाल को एक बार देखने के बाद ग्रामीणों की आंख भर आई। एसडीएम राहुल यादव की मौजूदगी में पूरे सैनिक सम्मान के साथ नम आंखों से शहीद विशाल चौधरी को अंतिम विदाई दी गई।

शहीद विशाल चौधरी माता-पिता और परिवार का एकमात्र सहारा थे। पूरा गांव अपने लाल को खोने के गम में था। गांव के किसी भी घर में शनिवार को लाल कीशहादत के बाद चूल्हे नहीं जले। सांसद डॉ. भोला सिंह, पूर्व मंत्री किरनपाल सिंह, विधायक गजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक होशियार सिंह और अनिल शर्मा, सपा नेता हिमायत अली, डॉ. तेजवीर सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी, कांग्रेस नेता चौ. श्यौपाल सिंह, जिला पंचायत सदस्य सुनील चरोरा, एसडीएम राहुल यादव, सीओ यशवीर सिंह, तहसीलदार और कोतवाल ने भी शहीद को अंतिम सलामी दी।

परिजनों को शहादत पर गर्व
शहीद विशाल चौधरी के परिवार में उनके पिता दीनदयाल चौधरी के अलावा मां आनंदी देवी, दो भाई बबलू और वीरेन्द्र तथा पत्नी मधु है। विशाल के दो लड़की खुशी और रिचा एवं एक लड़का हर्ष है। तीनों बच्चे छह साल पहले एक साथ पैदा हुए थे।  विशाल की शादी सात साल पहले नजदीक के ही गांव लछोई से हुई थी।

विशाल की शहादत पर उसके पूरे परिवार ने गर्व जताया है। शहीद के पिता दीनदयाल का कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिसने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। विशाल की मां आनंदी देवी का कहना है कि उन्हें अपने बेटे के खोने का दुख तो है, लेकिन वह खुशनसीब हैं कि उनका बेटा देश की रक्षा के लिए शहीद हुआ है। विशाल की पत्नी मधु का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन उसकी आंखों में गर्व के आंसू हैं।

हमेशा शहादत देता रहा है जनपद
1962 का चीन के साथ युद्ध हो, 1965 और 71 का पाकिस्तान के साथ युद्ध हो या फिर कारगिल का युद्ध। भारत माता की रक्षा और आतंकियों को ढेर करने के लिए जिले के जवान सबसे आगे रहे हैं। जनपद के जवान अपनी शहादत के लिए देश में हर बार सबसे आगे रहे हैं। जनपद का सैदपुर गांव देश का अकेला ऐसा गांव है, जिसमें सबसे ज्यादा जवान भारतीय सेना में हैं और हर घर से एक जवान देश की रक्षा कर रहा है।
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