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Bulandshahar News: काली नदी में केमिकल का जहर, खेतों में सूख रही किसानों की उम्मीद

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काली नदी के पास खेतों में भरा पानी। संवाद
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बुलंदशहर। काली नदी की सफाई को लेकर वर्षों से दावे होते रहे, योजनाएं बनती रहीं, लेकिन नदी में प्रदूषण का जहर कम होने के बजाय किसानों के खेतों तक पहुंचता जा रहा है। गुलावठी से लेकर अगौता, बुलंदशहर, शिकारपुर, पहासू और दानपुर क्षेत्र तक नदी के किनारे के खेतों में जहरीले और केमिकल युक्त पानी के कारण खड़ी फसल सूख रही है।
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कभी जिले की लाइफ लाइन रही काली नदी इन दिनों किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। काली नदी के पानी में इस कदर गंदगी और केमिकल शामिल कर दिया गया है, कि आसपास के खेतों में पानी पहुंचने पर फसल ही सूख रही है। आसपास के निकाय और ग्राम पंचायत क्षेत्रों से गंदे पानी के नाले सीधे काली में गिरते हैं और विभिन्न स्थानों पर लगी फैक्टरियों से भी केमिकल युक्त पानी सीधे नदी में डाल दिया जाता है। इसके चलते नदी का पानी जब खेतों के आसपास फैलता है तो प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो जाती है।

क्षेत्र के किसानों की बढ़ी चिंता, कार्रवाई शून्य

जिले में काली नदी के किनारे बसे गांव के किसानों शिवस्वरूप, छोटे, सुमन सिंह का कहना है कि काली नदी का पानी खेतों के लिए लगातार चिंता का कारण बनता जा रहा है। किसानों के अनुसार नदी के पानी से सिंचाई करने पर फसल का रंग और बढ़वार प्रभावित होती है। कुछ किसानों ने बताया कि पहले नदी का पानी मजबूरी में सिंचाई के काम आ जाता था, लेकिन अब पानी की गुणवत्ता ऐसी है कि खेतों में पानी पहुंचने के साथ ही फसल सूखने लगती है। किसान रामवीर और देवीलाल का कहना है कि खेत तैयार करने, बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद यदि फसल खराब होती है तो नुकसान सीधे किसान को उठाना पड़ता है। प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बनी हुई है।
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शिकारपुर-पहासू क्षेत्र में भी नदी बनी परेशानी
शिकारपुर और पहासू क्षेत्र में नदी के आसपास खेती करने वाले किसानों की भी ऐसी ही शिकायत है। गांव क्रियावली निवासी किसान चंद्रपाल सिंह, बिशंवर सिंह, राकेश, महेश, राखी देवी का कहना है कि नदी में कई जगह पानी का रंग बदला हुआ दिखाई देता है। दुर्गंध के कारण नदी के आसपास खड़ा होना भी मुश्किल होता है। नदी के पानी के संपर्क में आने वाले खेतों में अभी भी तीन से चार फिट पानी है और फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।


विभागों की निगरानी पर उठ रहे सवाल

काली नदी में प्रदूषण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग, सिंचाई विभाग और प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य निशांत बालियान ने मामले में सांसद को भी ज्ञापन सौंपा, लेकिन इसके बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। घुंघरावली बनवारीपुर के किसान टिकम सिंह, ठाकुर रनवीर सिंह, संदीप सिंह का आरोप है कि नदी में प्रदूषित पानी पहुंचने की शिकायतें कई बार अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि यदि नदी में गिरने वाले नालों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले पानी की नियमित जांच हो तथा दोषी इकाइयों पर कार्रवाई की जाए तो प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

किसान बोले- पानी साफ हो तो बच सकती है खेती

-काली नदी के पानी में गंदगी के साथ केमिकल भी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते खेत में पानी पहुंचते ही फसल सूखने लगती है। इसका समाधान किया जाना चाहिए। - पीतम सिंह, निवासी ऐमनपुर

-केमिकल युक्त पानी के कारण न केवल फसल बर्बाद हो रही है, बल्कि जमीन भी बंजर हो रही है। ऐसे में आवश्यक है कि काली नदी को साफ कराने के साथ ही गंदगी करने वालों पर भी कार्रवाई की जाए। अमरपाल सिंह, निवासी अच्छेजा घाट

-काली नदी के पास के खेतों में अब करीब चार माह तक पानी भरा रहता है। ऐसे में न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि जमीन भी बंजर हो रही है। प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जितेंद्र सिंह, निवासी अच्छेजा घाट

काली नदी के पास खेतों में भरा पानी। संवाद

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