नमामि गंगे मिशन के तहत अब खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए गांव गांव ‘चैंपियन’ तैयार किए जाएंगे। चैंपियन की मुख्य जिम्मेदारी गांव में लोगों को खुले में शौच से रोकना होगी। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए तीन तीन गांवोें पर एक स्वच्छता प्रहरी भी रखा जाएगा।
जिले में 951 ग्राम पंचायत हैं। 125 गांवों को अब तक खुले में शौच से मुक्त किया गया है। शेष गांवों को कवर करने के लिए गांव गांव चैंपियन चिंहित होंगे। गांव का पढ़ा लिखा और सक्रिय युवक चैंपियन चुना जाएगा।
चैंपियन की मुख्य जिम्मेदारी लोगों को खुले में शौच से रोकने की होगी। गांवों में ग्रामीण खुले में शौच के लिए क्यों निकल रहे हैं, चैंपियन सरकारी तंत्र को इसकी जानकारी भी देगा। चैंपियन ऐसे ग्रामीणों को भी चिंहित करेगा, जिनके घर पर शौचालय की व्यवस्था तो है लेकिन उन परिवारों के सदस्य खुले में शौच को जाते हैं।
ग्रामीणों को जागरूक करने के मकसद से प्रत्येक तीन ग्राम पंचायतों पर स्वच्छता प्रहरी चिंहित होंगे। स्वच्छता प्रहरी का काम ग्रामीणों को खुले में शौच के नुकसान बताते के साथ साथ लोगों को साफ सफाई के प्रति जागरूक करना होगा।
जनपद में शौचालय से वंचित परिवारों की संख्या 2.35 लाख से अधिक है। घरों में शौचालय नहीं होने से ग्रामीण खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। इन वंचित परिवारों को वर्ष-2019 तक कवर किया जाएगा।