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Bulandshahar News: ब्रज की 84 कोस परिक्रमा लगाने से मनुष्य का होता है उद्धार

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गांव बहलीमपुरा के ​शिव मंदिर पर  कथा सुनाते कथा वाचक। संवाद
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बुलंदशहर। राज राजेश्वर मंदिर और गांव बहलीमपुरा स्थित शिव मंदिर पर चल रही भागवत कथा सोमवार को भी जारी रही। कथा में पूतना वध, गोवर्धन लीला और महारास के प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
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राज राजेश्वर मंदिर में हरि नाम संकीर्तन मंडल रजिस्टर्ड की ओर से चल रही कथा में वृंदावन से आए कथा वाचक महाराज धनंजय ने बताया कि मनुष्य गोवर्धन पूजा कर ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा कर पुण्य कमा सकता है। ब्रज की 84 कोस परिक्रमा लगाने से मनुष्य का उद्धार होता है और 84 लाख योनियों से मुक्ति मिलती है। बताया कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर देवराज इंद्र के अहंकार का नाश किया और भक्तों की रक्षा का संदेश दिया।
कथा स्थल पर श्रद्धालु राधे-राधे और गोवर्धनधारी लाल की जय के जयघोष से झूम उठे। हरि नाम संकीर्तन मंडल के संचालक प्रदीप गोयल ने बताया कि कथा में क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन शाम 7:30 बजे भक्तमाल कथा का आयोजन भी किया जा रहा है।
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वहीं, दूसरी ओर गांव बहलीमपुरा स्थित शिव मंदिर पर मुकुंद शरण देवाचार्य महाराज ने भी रुक्मणी विवाह की कथा सुनाई। कहा कि रुक्मणी विवाह की कथा हिंदू धर्म में प्रेम, भक्ति और पराक्रम का एक अद्भुत संगम है। यह प्रसंग हमें सच्चे प्रेम और विश्वास की प्रेरणा देता है।
कहा कि श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया।
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गांव बहलीमपुरा के शिव मंदिर पर  कथा सुनाते कथा वाचक। संवाद

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