मोड़ पर तेज रफ्तार होने के कारण तेज रफ्तार निजी बस पलट गई। बृहस्पतिवार सुबह हुए हादसे में हेल्पर की मौत हो गई और तीन दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए। ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों की मदद से बस को हटाकर पांच लोगों को निकाला। सभी घायलों को खानपुर, औरंगाबाद सीएचसी पहुंचाया गया जहां हालत गंभीर होने पर दो को जिला अस्पताल भेजा गया।
खानपुर बस स्टैंड से सुबह साढ़े सात बजे निजी बस नंबर यूपी 81 बीटी 5657 बुलंदशहर के लिए रवाना हुई। यात्रियों के अनुसार भमरौली मोड़ पर चालक तेज रफ्तार बस पर काबू न रख सका और पलक झपकते ही बस सड़क किनारे पलट गई। चालक बस पलटती देखकर खिड़की से कूदकर भाग गया।
बस पलटते ही सवारियों की चीख पुकार सुनकर नजदीक के खेतों में काम कर रहे किसान उधर दौडे़। किसान राजवीर सिंह ने बस के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए पास के गांवों से फोन कर ट्रैक्टर मंगवाए। बस को हटाकर नीचे दबे पांचों घायलों को निकाला गया।
एंबुलेंस व वाहनों से घायल कलुआ, मुंशीराम, छोटू, नेत्रपाल, चुन्नीलाल, जितेंद्र, धनेश, बलराम, दिनेश, भूदेव शर्मा, महेंद्र, योगेंद्र, मुन्ना, सतेंद्र, पप्पू आदि को सीएचसी औरंगाबाद भेजा। चिकित्सकों ने कलुआ, मुंशीराम को बुलंदशहर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
वहां डॉक्टरों ने 24 वर्षीय हेल्पर कलुआ को मृत घोषित कर दिया। अनाथ कलुआ 10 साल से खानपुर बस स्टैंड पर रहता था और बस में हेल्पर का काम करता था। घायल नेत्रपाल सिंह ने बताया कि चालक फोन पर किसी को चार मिनट में पहुंचने को कह रहा था। एआरटीओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उपरोक्त बस 2011 मॉडल है। बस अलीगढ़ कार्यालय से पंजीकृत है।
सीएचसी में नहीं थे डॉक्टर, तड़पते रहे घायल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखावटी के चिकित्सक की लापरवाही से बस हादसे में घायल एक युवक काल के गाल में समा गया। आधे घंटे मरीज इलाज के लिए अस्पताल में तड़पते रहे। देरी से पहुुंचे चिकित्सकों ने इलाज की जगह उन्हें रेफर कर दिया।
खानपुर क्षेत्र में हादसे के बाद घायलों को एंबुलेंस से सीएचसी लखावटी लाया गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद भी अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। सभी 8-10 गंभीर रूप से घायल अस्पताल के इमरजेंसी रूप में इलाज के लिए तड़प रहे थे।
इस दौरान किसी ने सीएचसी प्रभारी को चिकित्सकों के न होने की जानकारी दी। करीब आधे घंटे बाद ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक मौके पर पहुंचा। चिकित्सक ने गंभीर रूप से घायल कालू, मुंशीराम और छोटे की मरहम पट्टी करने की बजाए उन्हें रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचते ही कालू ने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने बस के नीचे दबे लोगों को निकाला
ग्रामीण बस में दबे लोगों को समय से न निकालते तो मरने वालों की संख्या बढ़ सकती थी। ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि छोटे वाहनों की चेकिंग तो पुलिस आए दिन करती है, परंतु बस चलाने वालों के लाइसेंस नहीं देखती, जिनके हाथ में पचासों जिंदगी होती है।
सूचना पर दो चिकित्सकों को भेजा गया था। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक की लापरवाही पर कड़ी हिदायत दी गई है। -डॉ. अभिताव सिंह-प्रभारी सीएचसी लखावटी