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अब लड़खड़ाने की जगह दौड़ेगा बचपन, दिव्यांग बच्चें भी भर सकेंगे उड़ान

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अब लड़खड़ाने की जगह दौड़ेगा बचपन, दिव्यांग बच्चें भी भर सकेंगे उड़ान
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बुलंदशहर। बच्चों में जन्म के समय पैर टेढ़े-मेढ़े होने पर इलाज के लिए अब परिजनों को दिल्ली, मेरठ या कहीं और भटकना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत क्लब फुट क्लीनिक खोला गया है। जहां जिले के आठ जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर वाले बच्चों का उपचार शुरू कर दिया गया है। जिसके बाद उनकी जिंदगी लड़खड़ाएगी नहीं बल्कि दौडे़गी।
गर्भ में ही कुछ बच्चों के पैर टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं। बच्चों के जन्म के बाद इस बीमारी को सामान्य बोलचाल में जन्मता दोष और मेडिकल की भाषा में क्लब फुट कहते हैं। बच्चे के जन्म लेने के बाद अंदर की ओर घूमे हुए पैरों के पंजे या फिर चलने में दिक्कत होने पर अक्सर परिजनों को चिंता सताती रहती थी कि उनका बच्चा शायद ही कभी अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा। जिले में ऐसे कई परिवार हैं, जिनको यह बात सताती रहती है कि उनके बच्चे कभी अपने पैरों पर ठीक से खड़े हो पाएंगे या नहीं। इसके लिए वह दिल्ली, नोएडा और मेरठ समेत अन्य स्थानों पर उनका इलाज कराने के लिए दौड़भाग करते थे। ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ने क्लब फुट क्लीनिक खोलने की योजना बनाई। अफसरों के अनुसार जिला अस्पताल में क्लब फुट क्लीनिक खोलकर ऐसे बच्चों को ढूंढने के साथ ही उपचार शुरू कर दिया गया है। जीरो से पांच साल तक के बच्चों के लिए यह सुविधा मिलेगी। सबसे पहले प्लास्टर चढ़ाकर इलाज शुरू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की भी सुविधा दी जाएगी। बच्चे दिव्यांगता का दंश न झेलें इसको लेकर चिकित्सक पूरी तरह से तैयार हैं।
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बच्चे को जल्द देखेंगे दौड़ता हुआ
ऊंचागांव क्षेत्र निवासी एक बच्चे के पिता राहुल ने बताया कि बच्चे के जन्म के दौरान दोनों पैर टेढ़े-मेढ़े थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इलाज कराने में असमर्थ थे। आरबीएसके टीम से संपर्क करने के बाद अब बच्चे का जीवन सुधरने लगा है। जल्द ही वह दिन भी आएगा जब हमारा बेटा अपने पैरों पर दौड़ेगा।
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अभी तक मेडिकल कॉलेज में होता था उपचार
आरबीएसके टीम के मैनेजर ललित कुमार ने बताया कि अभी तक ऐसे बच्चों का इलाज कराने के लिए परिजनों को महंगी रकम खर्च करनी पड़ती थी और मेरठ, अलीगढ़, नोएडा और दिल्ली आदि तक दौड़ लगानी पड़ती थी। शासन से आदेश मिलने पर जिले में जन्मजात पैर टेढ़े-मेढ़े वाले बच्चों के परिजनों से संपर्क शुरू किया। जिसकी रिपोर्ट बनाकर उच्च अफसरों को भेजी गई। इसके बाद जिला अस्पताल में क्लब फुट क्लीनिक खोलकर आठ बच्चों का उपचार शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि चार साल तक के बच्चों के नि:शुल्क विशेष जूता (ब्रेस) मुहैया कराया जाएगा।
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जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में क्लब फुट क्लीनिक खुलने से जिले के लोगों को लाभ मिलेगा। दिव्यांगता से निजात दिलाने के लिए तथा बच्चों को उनके पैरों पर खड़ा करने के उद्देश्य से इस क्लीनिक की स्थापना की गई है। सप्ताह में सिर्फ एक दिन यानी हर मंगलवार को शून्य से दो वर्ष तथा इससे ऊपर के बच्चों का उपचार किया जाएगा।
डॉ. अवनेंद्र कुमार, एसीएमओ/नोडल अधिकारी
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