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Bulandshahar News: एक्यूआई 356, प्रदूषण में देश में छठे स्थान पर बुलंदशहर

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बुलंदशहर। ग्रैप का तीसरा चरण लागू होने के बावजूद अधिकारियों की हीलाहवाली जारी है। स्थिति यह है कि शहर समेत जिलेभर में खुलेआम निर्माण कार्य हो रहे हैं और प्रतिदिन कूड़ा जलाया जा रहा है। इससे हवा में जहर बढ़ता जा रहा है। सोमवार को 356 एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) के साथ बुलंदशहर देश का छठा सबसे प्रदूषित शहर रहा।
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शहर का एक्यूआई पिछले एक माह से खराब चल रहा है। इसको देखते हुए एक माह पूर्व ही ग्रैप की पाबंदियां लागू कर दी गई थीं, लेकिन गाइडलाइन का पालन नहीं होने से शहर की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। दमघोंटू हवा के बीच भी पीडब्ल्यूडी की ओर से स्याना रोड पर चौड़ीकरण का कार्य जारी है। इसके लिए तारकोल गर्म करने वाली मशीन सड़क पर उतारी गई है, जो प्रदूषण बढ़ा रही है।



इसके अलावा शहर के अंसारी रोड चौराहे पर पाइप लाइन डालने के लिए खोदाई की जा रही है। इससे उड़ रही धूल के कारण यहां से गुजरने वाले और स्थानीय लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। यमुनापुरम काॅलोनी में भी 10 से अधिक मकानों का निर्माण कार्य खुलेआम चल रहा है।
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आंखों में जलन बढ़ी, अस्थमा के रोगियों को देनी पड़ रही ऑक्सीजन



प्रदूषण का असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो रही है। सबसे अधिक समस्या अस्थमा के मरीजों को है। हर रोज अस्थमा के औसतन 10 से 12 मरीजों को ऑक्सीजन देनी पड़ रही है, जबकि सोमवार को शहर के विभिन्न अस्पतालों में अस्थमा के 40 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन देनी पड़ी। वहीं, जिला चिकित्सालय के नेत्र विभाग की ओपीडी में आंखों में जलन के 94 मरीज पहुंचे। इसके अलावा निजी चिकित्सालयों में भी आंखों में जलन व अस्थमा के रोगियों की भीड़ रही। मरीज अंजना ने बताया कि वह अस्थमा रोगी हैं। इन दिनों समय-समय पर सांस लेने में परेशानी होने से ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।
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आज-कल अस्थमा रोगियों की समस्या बढ़ गई है। ऐसे में मरीजों को ऑक्सीजन लगवानी पड़ रही है। इन दिनों प्रतिदिन मरीजों को ऑक्सीजन लगाई जा रही है।

- डॉ. एसके गोयल, अध्यक्ष आईएमए







सड़क निर्माण एवं खोदाई कार्य का मामला संज्ञान में नहीं है। जो भी कार्यदायी संस्था निर्माण कर रही है, उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

- राहुल शर्मा, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग





जो भी निर्माण कार्य चल रहे हैं, उनकी जांच कराकर कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।



- विमल कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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