ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास पर अंतरिम रोक
सिकंदराबाद (बुलंदशहर)। ब्लॉक प्रमुख के लिए पारित अविश्वास प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट में मामले के लंबित होने पर मनीष भाटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर मनीष भाटी और उनके समर्थकों में जश्न का माहौल है। वह इसे सत्य और न्याय की जीत बता रहे हैं।
मनीष भाटी सितंबर 2018 में सिकंदराबाद के ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए थे। अक्तूबर 2018 को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। और सात नवंबर को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। मनीष भाटी ने अविश्वास प्रस्ताव में उन सदस्यों के भी भाग लेने की बात कही थी जिन्होंने सदन की शपथ नहीं ली थी। उन्होंने नियम 1994 के तहत उन सदस्यों के प्रक्रिया में भाग लेने पर सवाल उठाया था। इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में मुद्दा पूर्ण पीठ के समक्ष लंबित होने के कारण मनीष भाटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मनीष भाटी की याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मनीष भाटी के वकील जसबीर सिंह मलिक की दलीलेें सुनने के बाद याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया है। पीठ ने बुलंदशहर के जिलाधिकारी के 13 नवंबर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जिलाधिकारी ने मनीष भाटी के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव को क्रियान्वित करते हुए ब्लॉक प्रमुख का चार्ज एसडीएम सिकंदराबाद को सौंप दिया था। मनीष भाटी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जसवीर सिंह मलिक ने अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन की शपथ नहीं लेने वाले निर्वाचित सदस्य कानूनन न तो अविश्वास प्रस्ताव में भाग ले सकते हैं और ना ही मतदान कर सकते हैं। इस मामले में कुल 143 सदस्यों में से केवल 87 सदस्यों ने शपथ ली थी। बताया कि कोर्ट ने उनके वकील की दलीलें सुनने के बाद प्रति पक्षियों को नोटिस जारी किया है। जसवीर सिंह मलिक की एसडीएम को चार्ज सौंपने के जिलाधिकारी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।