बुलंदशहर में 47 निजी स्कूलों नहीं लिया गरीब बच्चों का दाखिला
बुलंदशहर। शिक्षा के अधिकार के तहत चयनित बच्चों का प्रवेश न करने पर बीएसए ने जिले के 47 स्कूलों को नोटिस जारी कर दिए हैं। उक्त स्कूलों ने छात्र संख्या कम दिखाकर प्रवेश करने से मना कर दिया। मामला सीडीओ के संज्ञान में आने पर बीएसए ने यह नोटिस जारी किए हैं। सीडीओ की चेतावनी है कि बच्चों को प्रवेश न देने वाले स्कूलों की मान्यता निरस्त की जाएगी, साथ ही उनके खिलाफ शासन को भी लिखा जाएगा।
शिक्षा के अधिकार के तहत जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाए जाने का प्रावधान है। इसके लिए पात्र बच्चों से आवेदन प्राप्त किए जाते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से लॉटरी के माध्यम से बच्चों का चयन किया जाता है। बच्चों का चयन होने के बाद उन्हें निजी स्कूल का आवंटन किया जाता है, ताकि वह वहां जाकर अपना प्रवेश सुनिश्चित करवा सकें। पिछले दिनों विभाग की ओर से आवेदन मिलने पर विभाग की ओर से दो बार लॉटरी के माध्यम से करीब 1050 बच्चोें का चयन निजी स्कूल में प्रवेश दिलवाने के लिए किया गया था। इन बच्चों को बीएसए की ओर से वह स्कूल भी आवंटन कर दिए थे, जहां पर उनका प्रवेश होना था। लेकिन 47 स्कूलों ने छात्र संख्या कम दिखाकर इन बच्चों का प्रवेश करने से मना कर दिया। इस पर बीएसए बृहस्पतिवार को सीडीओ के समक्ष पेश हुए और पूरी स्थिति से अवगत करवाया। सीडीओ ने बीएसए को उक्त सभी 47 निजी स्कूलाें को नोटिस जारी करने के साथ उनकी मान्यता रद करने और उनके खिलाफ शासन को पत्र लिखने की चेतावनी दी है। सीडीओ के आदेश मिलते ही बीएसए ने उक्त स्कूलाें को नोटिस जारी करने के साथ आगामी कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
किसी भी स्कूल की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। उन्हें हरहाल में जरूरतमंद बच्चों का प्रवेश करना होगा। यदि वह छात्र संख्या कम दिखाकर बच्चों का प्रवेश नहीं करते हैं तो इसकी भी जांच की जाएगी। साथ ही ऐसे स्कूलों की मान्यता रद होने के साथ उनके खिलाफ शासन को पत्र लिखने के निर्देश भी बीएसए को दे दिए गए हैं।
- अभिषेक पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी।
सीडीओ के निर्देश पर छात्र संख्या कम दिखाकर बच्चों का प्रवेश न करने वाले 47 स्कूलों को नोटिस जारी कर दिए हैं। साथ ही उनके खिलाफ आगामी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी है। यदि उन्हाेंने नोटिस का समय पर जवाब नहीं दिया और बच्चों का प्रवेश नहीं किया तो जल्द ही कड़ी कार्रवाई होगी।
- अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी