तीन हेडकांस्टेबल व एक सिपाही के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज
बुलंदशहर। जनपद पुलिस में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए एसएसपी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सिकंदराबाद कोतवाली में तैनात तीन हेडकांस्टेबल और एक सिपाही को एसएसपी ने भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर निलंबित कर दिया है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और रंगदारी मांगने जैसे संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि उक्त सिपाही दूसरे राज्यों आदि से बदमाशों को पकड़कर लाते थे। इसके बाद उनके परिजनों से सौदा करते थे।
एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि हेड कांस्टेबल संजीव मलिक, जाहिर हुसैन, योगराज सिंह और सिपाही धीरज कुमार के बारे में भ्रष्टाचार में लिप्त होने की सूचना मिली थी। जिसके बाद आरोपियों की गोपनीय जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि आरोपी पुलिसकर्मी हरियाणा के गुड़गांव, मध्य प्रदेश के जिला राजगढ़, उत्तर प्रदेश के आगरा, रामपुर आदि स्थानों से बदमाश और बेकसूर लोगों को उठाते हैं और छोड़ने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। हैरत की बात यह है कि सिकंदराबाद कोतवाली इंस्पेक्टर को इन सब की जानकारी नहीं होती थी। कोर्ट कॉप्लेक्स गुड़गांव के एक अधिवक्ता दिनेश पाल चौहान ने एसएसपी को बताया कि जब पुलिसकर्मी किसी बेकसूर को उठाते थे तो उनके परिजन उनसे संपर्क करते थे। जिसके बाद वह खुद पुलिसकर्मियों तक पैसा पहुंचाकर बेकसूरों को छुड़ाते थे। आरोपी पुलिसकर्मी उन लोगों का ही फोन इस्तेमाल करते थे। जिन्हें उठाया जाता था।
64 आडियो क्लिप हैं मौजूद
मुकदमा दर्ज कराने वाले अधिवक्ता दिनेश पाल चौहान ने बताया कि उनके पास पुलिसकर्मियों की बातचीत की 64 आडियो क्लिप मौजूद है। जिनमें वह कभी 10 लाख रुपये तो कभी पांच लाख रुपये की मांग कर रहे हैं।
आगरा तक के पुलिसकर्मी शामिल
जिस समय सिकंदराबाद थाने में तैनात पुलिसकर्मी रामपुर, आगरा से बदमाशों और बेकसूरों को उठाते थे तो उनका साथ आगरा की बसई चौकी समेत अलग अलग कई चौकियों में तैनात 12 पुलिसकर्मी भी शामिल रहते थे।
जांच को गठित हुई एसआइटी
एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि प्रकरण में एक एसआइटी गठित की गई है। विवेचना एएसपी गोपाल कृष्ण चौधरी को सौंपी गई हैे, लेकिन उनकी मदद के लिए सर्विलांस प्रभारी, स्वाट टीम प्रभारी को लगाया गया है। एसआइटी की मॉनिटरिंग एसपी सिटी करेंगे।