दिल्ली में भीषण आग में जिस प्रकार भारी जनहानि हुई है उससे सरकार को सबक लेना चाहिए। देश के अलग-अलग हिस्सों में आज भी कई ऐसे स्थान हैं जहां आग जैसी अप्रिय घटना होने पर कोई सहायता नहीं पहुंच पाती। नलकूप व टंकी आदि से आग बुझाने के प्रयास किए जाते हैं। बुगरासी कस्बे का बाजार पूरी तरह से संकरा होने के साथ मोड़ होने के कारण कस्बे में कोई बड़ी गाड़ी निकल ही नहीं पाती।
यूं तो देश में कई बार आग के भीषण हादसे हुए हैं लेकिन सरकार ने कभी कोई सबक नहीं लिया। कस्बा क्षेत्र की बात करें तो आए दिन किसानों की फसलों में विद्युत तारों के टूटने के कारण अक्सर आग लगती रहती है। कई बार गर्मियों में गांवों में गरीबों के छप्पर में आग लगने से किसानों के पशु भी जलकर मर चुके हैं। आग बुझाने के नाम पर केवल ग्रामीण अपने स्तर पर ही एक-दूसरे की सहायता कर पाते हैं।
बुगरासी से बुलंदशहर की दूरी 45 किलोमीटर है और जब तक दमकल की गाड़ी घटना स्थल पर पहुंचेगी तब तक सब कुछ राख हो चुका होता है। कस्बे की बात करें तो सभी मुख्य बाजार संकरे रास्ते वाले हैं। इनमें भी मोड़ इतने हैं कि कोई भी बड़ी गाड़ी बाजार में जा ही नहीं पाती। यदि व्यापारियों का सामान भी आता है तो मजबूरन तांगा या छोटा हाथी आदि से मंगाना पड़ता है। अप्रिय घटना होने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने की बात तो दूर दो तांगे आपस में भी बच नहीं पाते। इसके लिए स्थानीय प्रशासन व राज्य को सरकार को हादसों से सबक लेते हुए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।