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बुलंदशहर की हवा और हुई अधिक जहरीली

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बुलंदशहर की हवा हुई और अधिक जहरीली, आंखों में होने लगी जलन
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बुलंदशहर। जिले की हवा मंगलवार को और अधिक जहरीली रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) भी 400 के करीब पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हवा की गति धीमी रहने और आतिशबाजी अधिक होने से वायु प्रदूषण में इजाफा हो रहा है। मंगलवार को जिले की हवा सांस के लिए खतरनाक स्तर पर पहुंच गई। वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनकर निकलें।
बता दें कि जनपद की हवा की गुणवत्ता गत माह से खराब हो रही है। इसका बड़ा कारण हवा की गति का धीमा रहना है। वहीं, दिवाली पर जमकर आतिशबाजी छोड़े जाने से हर क्षेत्र में सड़कों पर धुंआ फैला रहा। इससे जनपद का वायु प्रदूषण बढ़ गया, मंगलवार सुबह को तापमान कम होने से धुंध छाने लगी। नगर समेत जनपदभर में हर कहीं आसमान में स्मॉग/धुंध ही दिखाई दिया। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की हवा की शुद्धता जांच रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को जनपद का एक्यूआई 381 मापा गया। जिससे आम नागरिक समेत मरीजों को स्वच्छ सांस लेने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं, पर्यावरण विद् ने स्मॉग/धुंध से बचाव के लिए पौधरोपण करने और कूड़ा-कचरा आदि न जलाने की अपील की।
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ऐसे बनता है स्मॉग/धुंध
अनेक कारणों से हवा में धुएं व धूल के कण आ जाते हैं। धुएं में भी कई तरह के कण होते हैं। सर्दी की शुरुआत होने की वजह से इस समय वातावरण में नमी अधिक है। वातावरण की नमी को धूल के कण सोख लेते हैं। इससे कण भी थोड़े से मोटे हो जाते हैं। धूल के कण बार-बार सोखने से ये वातावरण में एक मोटी परत के रुप में जमा हो जाते हैं और धूप को नीचे आने से रोकते हैं। जानकारी के अनुसार हवा हमेशा गर्म क्षेत्र से ठंडे क्षेत्र की ओर बहती है।
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बरतें सावधानी, हो सकती है परेशानी
स्मॉग/धुंध के कण के साथ-साथ सल्फर डाई ऑक्साइड जैसी नुकसानदायक गैस भी होती हैं। इनके असर से पर्यावरण में ऑक्सीजन कम हो जाती है। वहीं, ये गैसें सांस के जरिये शरीर में जाकर नुकसान पहुंचाती है और इनसे अस्थमा अटैक भी आ सकता है। सांस रोगियों को ऐसे वातावरण में घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। साथ ही अगर स्मॉग के रहते बारिश होती है तो इससे भी हानिकारक गैस पानी के साथ नीचे आएगी। इसलिए इस बारिश में नहीं भीगना चाहिए।
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इस तरह मापा जाता है एयर क्वालिटी इंडेक्स
वायु प्रदूषण मापने के आठ मानक (प्रदूषण तत्व पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, सल्फर डाईऑक्साइड, एल्युमिनियम व लेड) होते हैं। प्रदूषण अफसरों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण पीएम 2.5 और पीएम 10 ही होते हैं। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मापते समय पीएम 2.5, पीएम 10 और किसी एक अन्य मानक को शामिल किया जाता है। इसका केवल स्टैंडर्ड होता है, कोइ मापक इकाई नहीं होती। किसी भी चीज के जलने से जो प्रदूषण होता है, उसमें पीएम 2.5 और धूल के कणों में पीएम 10 होता है।
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वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय
- मुंह और नाक पर कपड़ा रखकर घर से बाहर निकले।
- पेड़ और हरियाली वाले स्थान पर अधिक समय बिताएं।
- दमा-सांस के मरीज बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले।
- सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।
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दिवाली पर आतिशबाजी छोड़े जाने से जनपद में वायु प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- ई जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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दिवाली पर वायु प्रदूषण तो बढ़ा है, लेकिन जनपद के सरकारी अस्पतालों में अवकाश के चलते सांस, दमा आदि का कोई मरीज उपचार के लिए नहीं पहुंचा है। बुधवार को ओपीडी खुलने पर मरीजों के आने पर स्थिति का पता चल सकेगा। उन्होंने सभी से मौसम के अनुसार घर से बाहर निकलने की अपील की।
- डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
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