एलआई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
सिकंदराबाद। एलआईसी में विनिवेश के विरोध में मंगलवार को अधिकारियों, कर्मचारियों, अभिकर्ताओं की की यूनियन ने संयुक्त के आवाहन पर एक घंटा कार्य का बहिष्कार किया। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को वापस लिए जाने की मांग की।
विरोध में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने भारतीय जीवन बीमा निगम में विनिवेश के फैसले को देश की जनता और एलआईसी बीमा निगम के साथ विश्वासघात बताया। वक्ताओं ने कहा कि 1956 में भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना के समय सरकार द्वारा पांच करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। जिसके प्रतिफल के रूप में भारतीय जीवन बीमा निगम प्रतिवर्ष मूल्यांकन के पश्चात सरप्लस के रूप में 95 प्रतिशत बीमाधारकों को बोनस के रूप में वितरित करता है। पांच प्रतिशत सरकार को उसके लाभांश के रूप में देता हैं। बताया कि वर्ष 2018-2019 के मूल्यांकन के आधार पर एलआईसी ने सरकार को 2610 करोड़ लाभांश के रूप में दिए। मुनाफे में होने के बावजूद भी एलआईसी के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि एलआईसी आज भी बीमा बाजार की नेतृत्वकर्ता संस्थान है। विनेश के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने 12.30 से 1.30 बजे तक कार्य का बहिष्कार कर विरोध प्रकट किया। साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विनिवेश को फैसले को वापस लिए जाने की मांग की। फैसला वापस नहीं लेने पर कर्मचारियों ने फैसले के खिलाफ संघर्ष किए जाने की घोषणा की। प्रदर्शनकारियों में मुनीश कुमार शर्मा, राजकुमार सिंह, दीपक शर्मा, नरेंद्र गुप्ता समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।