पेंशन के लिए भटक रही द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले सैनिक की विधवा
सिकंदराबाद। द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिक की विधवा पेंशन के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए 15 दिन से ब्लॉक के चक्कर लगा रही हैं। अधिकारी कागजों की खानापूर्ति के नाम पर वृद्ध की मदद के बजाए उससे चक्कर लगवा रहे हैं।
कोतवाली क्षेत्र के गांव निजामपुर निवासी बर्फी देवी पत्नी स्वर्गीय हरिराम ने बताया कि उसके पति भारतीय सेना में सिपाही थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया। द्वितीय विश्व के दौरान वह 23 जनवरी 1942 से 20 दिसंबर 1944 तक भारतीय सेना का हिस्सा रहे। बताया कि 31 मई 1997 को उनकी मृत्यु हो गई। बताया कि उसे उत्तर प्रदेश सरकार की योजना द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिकों की विधवाओं को पेंशन योजना के तहत पेंशन मिल रही थी। बताया कि पिछले करीब सात माह से उसकी पेंशन बंद हो गई है। पेंशन के बंद होने से उसके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। बच्चे सभी शादीशुदा हैं। वह अपनी पेंशन पर ही निर्भर थी। पेंशन के नहीं मिलने वह उसके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। बताया कि पेंशन के रिलीज कराने के लिए वह प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए करीब 15 दिन से ब्लॉक के चक्कर लगा रही हैं। मगर कागजों की खानापूर्ति करने के नाम पर उसके प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं किया जा रहा। उमर के इस पड़ाव पर जबकि उसका शरीर भी पूरी तरीके से उसका साथ नहीं दे रहा है, फिर भी वह बार-बार ब्लॉक के चक्कर लगाने को मजबूूर हैं।
मामले की जानकारी कर प्रमाण पत्रों का अविलंब सत्यापन कराया जाएगा। - बीडीओ प्रेमचंद।