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बैंकों की लापरवाही पर मांगा स्पष्टीकरण

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बैंकों की लापरवाही पर मांगा स्पष्टीकरण
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बुलंदशहर। भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (स्वनिधि) योजना में बैंकों की लापरवाही सामने आई है। एडीएम प्रशासन ने सात बैंकों के जिला समन्वयकों से स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही बैंकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है।
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पीएम स्वनिधि योजना का क्रियान्वयन जिले की सभी 17 निकायों में चल रहा है। योजना के तहत कोविड-19 महामारी में लॉकडाउन से प्रभावित शहरी पथ विक्रेताओं का काम धंधा बंद हो गया था। जिसको देखते हुए पथ विक्रेताओं को 10 हजार रुपये का लोन सब्सिडी के आधार पर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से बैंकों को समय-समय पर निर्देशित किया गया कि आवेदन पत्रों की कमियों को दूर करते हुए ऋण उपलब्ध कराया जाए। एडीएम प्रशासन रवीन्द्र कुमार ने बताया कि गत 17 मार्च को आयोजित बैठक में बैंकर्स द्वारा आवेदन पत्रों के अस्वीकृत होने की बात कही गई थी। जिस पर एडीएम ने सभी बैंकर्स से 18 मार्च तक अस्वीकृत आवेदन पत्रों की सूची कारण सहित मांगी थी, लेकिन सात बैंकों के जिला समन्वयकों ने 20 मार्च तक भी सूची उपलब्ध नहीं कराई थी। जिस पर एडीएम ने जिला समन्वयकों विकास शर्मा एसबीआई, विजय गांधी पीएनबी, प्रताप सिंह धारीवाल बीओबी, अतुल गोयल आईबी, अभिषेक यादव आईओबी, पंकज यादव प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक, ओपी सिंह केनरा बैंक से स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही उक्त बैंक प्रबंधकों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की संस्तुति की है। यदि इस पर भी बैंकर्स की कार्यशैली में परिवर्तन नहीं आता है तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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17 मार्च को हुई बैठक में बैंकों पर लंबित मामले
इंडियन बैंक 554
भारतीय स्टेट बैंक 916
पंजाब नेशनल बैंक 1852
बैंक ऑफ बड़ौदा 774
केनरा बैंक 514
इंडियन ओवरसीज बैंक 150
प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक 123
यूनियन बैंक 280
बैंक ऑफ इंडिया 80
जिला सहकारी बैंक 183
एचडीएफसी 78
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