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लाखों की नकली करेंसी के साथ दो गिरफ्तार, पंचायत चुनाव में खपाने की थी तैयारी

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लाखोें की नकली करेंसी के साथ दो गिरफ्तार, पंचायत चुनाव में खपाने की थी तैयारी
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बुलंदशहर। एसओजी टीम और सिकंदराबाद पुलिस ने शनिवार सुबह 3.36 लाख की नकली करेंसी बरामद की है। साथ ही दो सप्लायर भी पकड़े हैं। जबकि, एक आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। पकड़े गए आरोपियों को पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। बताया गया कि गाजियाबाद में बनाई गई इस नकली करेंसी का इस्तेमाल आगामी पंचायत चुनाव में किया जा सकता था।
एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि एसओजी प्रभारी सुधीर कुमार त्यागी और थाना सिकंदराबाद पुलिस की संयुक्त टीम शनिवार सुबह सिकंदराबाद क्षेत्र में वांछित अपराधियों की तलाश में थी। इस दौरान टीम को मुखबिर ने सूचना दी कि एक युवक नोएडा की ओर से बाइक लेकर बुलंदशहर की ओर नकली करेंसी खपाने जा रहा है। सूचना मिलते ही टीम ने सिकंदराबाद स्थित जोखाबाद तिराहे पर चेकिंग अभियान चलाया और एक आरोपी को घेराबंदी कर दबोच लिया। जिसकी शिनाख्त फरमान निवासी श्रीराम कॉलोनी थाना डासना के रूप में हुई। पुलिस ने उसके कब्जे से एक लाख 15 हजार 100 रुपये के नकली नोट की खेप बरामद की। पूछताछ के बाद उसी की निशानदेही पर गाजियाबाद के थाना मसूरी के मोहल्ला किला निवासी फखरू के घर छापा मारे। जहां से फखरू को दबोचा गया और उसके पास से दो लाख 21 हजार 500 रुपये के अधबने नकली नोट के साथ, प्रिंटर, स्कैनर आदि सामान बरामद किया गया। जबकि, मौके से एक आरोपी फरार हो गया। एसएसपी ने बताया कि ये दोनों नकली नोट तैयार कर इन्हें फल विक्रेताओं, सब्जी विक्रेताओं, दूध वालों और शराब के ठेकों पर चलाते थे। साथ ही अब इनकी योजना पंचायत चुनाव में वोट के बदले नकली नोट खपाने की थी।
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यह गिरोह नकली नोट तैयार कर बाजार में चालीस प्रतिशत के भाव में चलाता था। पुलिस टीम ने दावा किया बरामद प्रिंटर, स्कैनर से ही यह नकली नोट तैयार कर रहे थे, लेकिन पुलिस टीम कंप्यूटर या लैपटॉप बरामद नहीं कर सकी। पुलिस के अनुसार यह इसी से नोट तैयार कर रहे थे। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार बिना कंप्यूटर व लैपटॉप के स्कैन किए गए नोट की फिनीशिंग करना बहुत मुश्किल है। पकड़े गए दोनों ही आरोपी खुद को अनपढ़ बता रहे हैं।
आरोपी गाजियाबाद में नकली करेंसी तैयार कर उसे दिल्ली के सीमापुरी व अन्य क्षेत्र सहित लोनी आदि स्थानों पर दुकानदारों को देते थे। दुकानदारों को इसकी भनक तक नहीं लग पाती थी। क्योंकि, आरोपी एक-एक नोट चलाया करते थे। हालांकि, पुलिस अभी यह नहीं बता सकी है कि आरोपियों ने पूर्व में यह करेंसी कहां- कहां इस्तेमाल की है।
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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एक ही नंबर के नोट बना रहे थे। इसकी जानकारी आरोपियों के पास से बरामद करेंसी से भी हो रही है। एक तरह के नोटों पर एक ही नंबर अंकित है।
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