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वीआईपी नंबरों का घटा क्रेज, नहीं मिल रहे खरीददार

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वीआईपी नंबरों का घटा क्रेज, नहीं मिल रहे खरीददार
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बुलंदशहर। जिले के वाहन स्वामियों में अब वीआईपी नंबरों का क्रेज कम होता जा रहा है। आलम यह है कि जिन नंबरों को पाने के लिए पहले मारामारी रहने के साथ सिफारिशें कराई जाती थीं, अब इन नंबरों के खरीदार परिवहन विभाग को ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इससे वीआईपी नंबर की सीरीज बिना बिके ही समाप्त हो जा रही है। वर्ष 2019 में जहां 316 नंबर बिके तो वहीं, वर्ष 2020 में महज 186 लोगों ने ऑनलाइन बोली के माध्यम से वीआईपी नंबर खरीदे, जिसमें मात्र चार लोगों ने एक-एक लाख रुपये में 0001, 0006 और 0007 नंबर खरीदे।
बताया जाता है कि दो वर्ष पूर्व वीआईपी नंबरों की खूब मांग होती थी, यहां तक कि वीआईपी नंबरों को पाने के लिए खूब सिफारिशें भी कराई जाती थीं। लोगों में वाहन खरीदने के बाद 0001 और 0010, 0786, 1111 व 9999 सीरीज नंबर के लिए सिफारिशें करानी पड़ती थीं। विभाग में मार्च 2019 से वीआईपी नंबरों की बुकिंग के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके साथ ही सरकार ने वीआईपी नंबरों के लिए शुल्क भी बढ़ा दिया। दोपहिया वाहन के वीआईपी नंबर के लिए 20 हजार रुपये और चार पहिया वाहन के लिए एक लाख रुपये तक कर दिया। ऐसे में वाहन चालकों में इन नंबरों की चाहत ही खत्म होती जा रही है।
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वाहन स्वामी जितेंद्र भाटी ने बताया कि पहले 15 हजार रुपये में वीआईपी नंबर मिल जाते थे। नंबरों की मारामारी को लेकर विभाग द्वारा मार्च 2019 से नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसमें नए सीरीज की शुरुआत में ही आकर्षण एवं महत्वपूर्ण नंबरों की बोली लगाई जाती है।
विभागीय अफसरों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत कुल 339 नंबरों कीे वीआईपी सीरीज में रखकर नया आधार मूल्य तय किया गया है। इसमें चार श्रेणी निर्धारित की गई है। अति आकर्षण श्रेणी में 10, अति महत्वपूर्ण में 46, आकर्षक में 96 और महत्वपूर्ण पंजीयन श्रेणी में 187 नंबर शामिल हैं। 96 आकर्षक पंजीयन नंबरों के लिए दो पहिया वाहन वाले पांच हजार और चार पहिया को 25 हजार रुपये, 187 महत्वपूर्ण नंबरों के लिए दोपहिया को तीन हजार और चार पहिया को 15 हजार रुपये तक देने पड़ेंगे।
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मोहम्मद कय्यूम, एआरटीओ प्रशासन - वीआईपी नंबरों के खरीदार बड़े शहरों की अपेक्षा जिले में कम हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया और आधार मूल्य बढ़ने पर बुकिंग भी कम हो रही है। गत दो वर्षों से वीआईपी नंबर न खरीदे जाने से शेष नंबर सीरीज में खाली रह जाते हैं। वर्ष 2019 की अपेक्षा 2020 में कम नंबर बिके हैं।
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