गिरा भूजल स्तर, ऊंचागांव भी डार्कजोन में शामिल
बुलंदशहर। भूजल स्तर तेजी से गिरने के कारण सेमी क्रिटिकल श्रेणी में शामिल ब्लॉक ऊंचागांव अब डार्कजोन में शामिल हो गया है। अब तक जनपद में आठ ब्लॉक डार्कजोन में शामिल थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर नौ हो गई है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने जनपद के डार्कजोन ब्लॉकों की सूची जारी की है।
पानी के अधिक दोहन के कारण जनपद के ब्लॉकों में पानी का स्तर नीचे खिसक रहा है। शासन के जल शक्ति मिशन के अंतर्गत जनपद में बड़े स्तर पर पानी बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और लोगाें को भी जागरूक किया जा रहा है। बावजूद इसके कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। अभी तक जनपद के ब्लॉक बीबीनगर, खुर्जा, शिकारपुर, बुलंदशहर, दानपुर, गुलावठी, सिकंदराबाद और स्याना डार्कजोन में शामिल थे। जबकि गत वर्ष ऊंचागांव ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में शामिल था। अब केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने जनपद के डार्कजोन ब्लॉकों की सूची जारी की है। इस सूची में ब्लॉक ऊंचागांव भी डार्कजोन में शामिल हो गया है। बताया गया कि इन ब्लॉकों में भूजल स्तर 200 से 250 फीट तक नीचे पहुंच गया है। यदि इसी तरह पानी का दोहन होता रहा तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ऊंचागांव ब्लॉक गंगा नदी से सटा है तो यहां से एक नहर भी गुजर रही है। बावजूद इसके यह ब्लॉक डार्कजोन में शामिल होना चिंता का विषय है। विभागीय अफसरों ने बताया कि जनपद में 16 में से नौ ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हो गए हैं। जबकि अब सात ब्लॉक ही सुरक्षित बचे हैं। इन ब्लॉकों का भूजल स्तर भी लगातार नीचे खिसक रहा है। इसे देखते हुए जनपद की जनता को पानी बचाने के लिए आगे आना होगा। विभागीय अधिकारियों ने यह भी बताया कि डार्कजोन में शामिल हुए ब्लॉक ऊंचागांव में नए बोरिंग और सबमर्सिबल पंप लगाने पर भी रोक लगा दी है। जबकि पहले से ही डार्कजोन में शामिल आठ ब्लॉकों में नए बोरिंग और सबमर्सिबल पंप लगाने पर रोक लगाई हुई है।
राकेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग - अभी तक जनपद का ऊंचागांव ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में शामिल था, लेकिन अब यह ब्लॉक भी डार्कजोन में शामिल हो गया है। जनपद के डार्कजोन ब्लॉकों की केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने सूची जारी की है। ऊंचागांव ब्लॉक डार्कजोन में शामिल होने से अब यहां भी नए बोरिंग और सबमर्सिबल पंप लगाने पर रोक लगा दी गई है। जनता को अब जागरूक होने की जरूरत है, ताकि लगातार गिर रहे भूजल स्तर को बचाया जा सके।