अनूपशहर स्थित ऐतहासिक गुरूद्वारा हरिराय साहिब
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बुलंदशहर में यहां थी सातवें सिख गुरु की पावन सुसराल
सिख समुदाय के सातवें गुरू हरिराय साहब की पावन सुसराल अनूपशहर में थी। अनूपशहर निवासी किशन कौर से हरिराय साहब से विवाह हुआ था। किशनकौर के पुत्र हरिकिशन जी महाराज ही आगे चलकर सिख समुदाय के आठवें गुरू बने थे। हरिराया साहब की पावन सुसराल के उपलक्ष्य में अनूपशहर के मोहल्ला मदारगेट में सातवीं पातशाही गुरूद्वारा हरिराय साहब स्थापित किया है। जहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर प्रथम सिख गुरू नानकदेव जी महाराज के प्रकाशोत्सव पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब का अखंड पाठ व रागी जत्थों द्वारा संगत के साथ शबद कीर्तन का आयोजन किया जाता है। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेठी अमृतसर की देखरेख में हैं। अनूपशहर गंगातट पर कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर लगने लक्खी कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेला के दौरान निकलने वाली गुरू नानकदेव जयंती शोभायात्रा मेला का मुख्य आर्कषण होती है।