फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

विज्ञापन
आरोपी। - फोटो : BULANDSHAHR
विज्ञापन
फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
विज्ञापन

औरंगाबाद। स्वाट टीम और औरंगाबाद पुलिस ने दो हजार रुपये में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट बनाकर बेच रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से नौ फर्जी मार्कशीट के साथ कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कूल की मोहर समेत अन्य सामान बरामद किया है। आरोपियों ने अब तक 25 मार्कशीट बनाकर बेचने की बात स्वीकारी है।
औरंगाबाद थाना प्रभारी अवधेश त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि एक युवक पवसरा रोड पर फर्जी मार्कशीट बनाकर बेचने का गोरखधंधा चला रहा है। पुलिस ने मुखबिर द्वारा बताए गए साइबर कैफे पर छापा मारकर नौ फर्जी मार्कशीट, कंप्यूटर, प्रिंटर, की-बोर्ड, माउस और दस स्कूलों की मोहरें, पैड के साथ साइबर संचालक मोबीन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में दुकान से बरामद हुई फर्जी मार्कशीट के विषय में सख्ती से पूछताछ में आरोपी ने बताया कि गांव सैदपुरा निवासी उमेश पुत्र हरेन्द्र और गांव राजगढ़ी निवासी अनुज पुत्र ब्रहमपाल सिंह फर्जी मार्कशीट बनवाते हैं। इसी काम के वे उसेे दो हजार रुपये देते हैं। पुलिस ने अन्य दोनों आरोपियों को भी दबोच लिया। साथ ही तीनों आरोपियों को पुलिस ने बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इंस्पेक्टर अवधेश त्रिपाठी ने बताया कि तीनों आरोपी शातिर किस्म के व्यक्ति हैं। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में फर्जी कागजात बरामद हुए हैं।
विज्ञापन

--------
दुकान की आड़ में चल रहा था फर्जी मार्कशीट बनाने का धंधा
- पूर्व में भी जेल जा चुका है मोबीन, जेल से छूटने पर फिर शुरू किया था धंधा
माई सिटी रिपोर्टर
औरंगाबाद। कस्बा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से फर्जी मार्कशीट बनाकर उन्हें बेचने का धंधा साइबर कैफे की आड़ में चला आ रहा था। पूर्व में भी आरोपी मोबीन इस मामले में जेल जा चुका है। लेकिन, जेल से छूटने के बाद मोबीन ने फिर से अपने पुराने काम को ही अंजाम देना शुरू कर दिया।
स्वाट टीम और औरंगाबाद पुलिस की गिरफ्त में आये तीन युवकों में मोबीन बेहद शातिर किस्म का व्यक्ति है। उसकी पवसरा मोड़ पर एक धार्मिक स्थल के पास कंप्यूटर की दुकान है। सैदपुरा निवासी उमेश और राजगढ़ी निवासी अनुज मोबीन के लिये काम करते हैं। उमेश और अनुज क्षेत्र के भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसा कर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट बनवाकर उनको भारी दामों में बेचते हैं। जबकि दोनों युवक मोबीन को मात्र दो हजार रुपये ही देते थे। जिस प्रकार मोबीन की दुकान से भारी मात्रा में नामी स्कूलों की मोहरें और स्टांप मिले है। इससे साफ प्रतीत होता है कि आरोपी किसी भी स्कूल के नाम से फर्जी मार्कशीट बनाकर बेच देते थे। इस दौरान आरोपियों को किसी का भी खौफ नहीं था। पुलिस के अनुसार मोबीन पहले भी इसी मामले में जेल जा चुका है। जेल से छूटकर आने के बाद मोबीन ने फिर से फर्जी मार्कशीट बनाने के काम में कदम रख दिया था। वह करीब दो दशकों से गोरखधंधे को अंजाम देता चला आ रहा था।
विज्ञापन

---------
20 वर्ष और सिर्फ 25 मार्कशीट
पुलिस की पूछताछ में 20 वर्षों के भीतर 25 मार्कशीट फर्जी बनाने की बात कुबूल की है। लेकिन, यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही है। लोगों का कहना है कि मोबीन फर्जी काम करने में पहले से ही बदनाम है। ऐसे में आरोपी ने फर्जी सैकड़ों मार्कशीट बनाकर बेची होंगी। पुलिस दुकानदार से बरामद फर्जी मार्कशीट की गहनता से जांच कर रही है। जिन लोगों को फर्जी मार्कशीट मिली है उन लोगों से भी पूछताछ की जायेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें