कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जहां अधिकांश लोग पूरी तरह से टूट चुके थे। बाहर न निकल पाने के कारण घर में बैठे-बैठे ऊब गए थे। हिम्मत और हौसला हारकर जल्द से जल्द समय के बीतने का इंतजार कर रहे थे। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इस कठिन दौर से बाहर निकलने का रास्ता अख्तियार कर लिया। आत्मचिंतन और आत्ममंथन के जरिए खुद को जानने और समझने की कोशिश की। उन्हें महसूस भी हुआ कि भाग-दौड़ और आडंबर युक्त इस जिंदगी से इतर भी कुछ है, जो मन को सुकून देती है। साहित्य, संगीत, कला के साथ-साथ उन लोगों ने अपने बच्चों और परिवार के लोगों को गहराई से समझने की कोशिश की।
लॉकडाउन में बिताए पल ने दी आत्म संतुष्टि
स्याना निवासी डॉ हेमा शर्मा को कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का भरपूर अवसर मिला। आत्ममंथन के जरिए उन्होंने जाना कि मात्र भोजन, परिवार और घर ही हमारी खुशियों के लिए पर्याप्त नहीं है। डॉ हेमा ने बताया कि उन्होंने इस दौरान सीखा कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता। दूरगामी दृष्टिकोण की सोच विकसित की। खोखले रिश्तों को तिलांजलि देने का निर्णय लिया।बताया कि इस दौरान रूटीन से हट कर अपनी अभिरुचियों को पूर्ण करने का अवसर मिला। मनपसंद फिल्में लैपटॉप पर देखीं। अपने पुत्र को समय दिया। उन्होंने बताया कि शायद कोरोना काल न होने पर मैं उसे इतना समय नहीं दे पाती। लॉकडाउन के कारण संयुक्त परिवार का महत्व और गहराई से जानने का अवसर मिला। बेटे से कंप्यूटर सीखा।
पठन-पाठन और लेखन रुचि को जगाने का मिला मौका
स्याना निवासी डॉ मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि उन्हें किशोरा अवस्था से पठन और लेखन में रुचि थी। लेकिन चिकित्सक बनने के उपरांत समयाभाव के कारण उनका यह शौक धरा ही रह गया था। बताया कि लॉकडाउन में उन्होंने घर बैठे खूब अध्ययन किया। चिकित्सा विज्ञान से लेकर प्राच्य हिंदी साहित्य तक, अध्यात्म से लेकर टेक्नोलॉजी तक, साइंस से लेकर संगीत तक, विभिन्न क्षेत्रों में खूब पठन किया। उन्होंने बताया कि उनके परिचित एक वरिष्ठ सर्जन की प्रकाशित उपन्यास ने उन्हें लेखन के लिए भी प्रेरित किया। उस दौरान उन्होंने दो पुस्तकें लिखनी शुरू की। जिसमें एक पुस्तक लगभग 70 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। दूसरी की शुरुआत है जो चिकित्सा शास्त्र में शरीर रचना एवं शरीर क्रिया विज्ञान के रहस्यों के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी कुरेदती है। चंद दिनों पूर्व उन्होंने वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक पढ़ी। कोरोना काल में मुझे लेखनकर्म करने एवं पढ़ने से जो आत्मसंतुष्टि का अहसास हुआ है, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता।