जिला योजना में 374 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को हरी झंडी मिलने के बाद भी बुलंदशहर की झोली अभी तक खाली है। दो मई को हुई बोर्ड बैठक में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि के प्रस्ताव भेजे गए थे। इनको जिले के प्रभारी मंत्री रामसकल गुर्जर की मौजूदगी में स्वीकार किया गया था।
अधिकारियों ने लखनऊ से मांगी गई क्वायरी भी पूरी कर दी थीं, लेकिन बजट जारी होने में देरी हो रही है। जिला योजना की बोर्ड बैठक में कृषि विभाग को 20 लाख रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई थी। गन्ना विभाग को 2.22 करोड़, लघु सीमांत कृषकों को 4.16 करोड़, पशुपालन विभाग को 7.07 करोड़, डेयरी विभाग को
6.34 करोड़, मत्स्य विभाग को 8.20 लाख, वन विभाग को 2.83 करोड़, सहकारिता को एक लाख, ग्राम्य विकास को 2.31 करोड़, रोजगार को 3.28 करोड़, भूमि सुधार को एक करोड़, पंचायती राज विभाग को 09.84 करोड़, सामुदायिक विकास को 7.73 करोड़, राजकीय लघु सिंचाई विभाग को 3.34 करोड़, निजी लघु सिंचाई को 9 करोड़, अतिरिक्त ऊर्जा को 2.92 करोड़,
खादी ग्रामोद्योग को 12 लाख, सड़क व पुल को 122 करोड़, पर्यटन को 2.80 करोड़, प्राथमिक शिक्षा को 53.63 करोड, माध्यमिक शिक्षा को 2.70 करोड़, प्राविधिक शिक्षा को 2 करोड़, प्रादेशिक विकास दल को 50 लाख, खेल-कूद को 2.06 करोड़, आयुर्वेद यूनानी को 2.17 करोड़, होम्योपैथी चिकित्सा को 2.90 करोड़, ग्रामीण पेयजल को 14.44 करोड़,
ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम को 18.00 करोड़, ग्रामीण आवास को 22.66 करोड़, नगर विकास को 70 लाख, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को 23 लाख, शिल्पकार प्रशिक्षण को 2 करोड़, पुष्टाहार को 37.50 करोड,़ महिला कल्याण को 4.26 करोड़, विकलांग कल्याण को 6.34 करोड़, समाज कल्याण
को 22.25 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को प्रभारी मंत्री राम सकल गुर्जर ने स्वीकृति दी थी। शासन से भी इनको स्वीकृति मिल चुकी है। अब तक सरकार ने जिले को इसका बजट जारी नहीं किया है। इससे विकास का पहिया थम गया है।
योजना की धनराशि मार्च तक जारी हो सकती है। अब जिले में विकास इसका बजट जारी होने पर ही हो पाएगा। आचार संहिता लगने से जहां विकास धनराशि जारी होने पर रोक लग जाएगी, वहीं जिला योजना का बजट मिलने में कोई अड़चन नहीं आएगी।