विधानसभा चुनाव में बसपा की सोशल इंजीनियरिंग (दलित मुस्लिम) फ्लॉप रही। सिकंदराबाद और बुलंदशहर जैसी मुस्लिम-दलित बाहुल्य सीटों पर भी बसपा को शिकस्त मिली। मुस्लिम मतों का बड़े स्तर पर बंटवारा हुआ। बीजेपी का दलित वोटर्स में सेंधमारी का फार्मूला सफल रहा।
सिकंदराबाद विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता 90 हजार और दलित 80 हजार हैं। दलित-मुस्लिम मतदाताआ को मिला दें तो यहां इन दोनों समुदायों के 1.70 लाख मतदाता हैं। सॉलिड वोटर्स को आधार मानकर बसपा ने हाजी इमरान को प्रत्याशी बनाया था। हाजी इमरान सिकंदराबाद सीट पर अकेले मुस्लिम प्रत्याशी थे।
इसलिए सपा से अब्दुल रब का टिकट कटने के बाद बसपा केंडीडेट की जीत पक्की मानी जा रही थी। बावजूद बसपा प्रत्याशी को 76333 वोट मिले। बुलंदशहर में एक लाख मुस्लिम मतदाता और 60 हजार दलित वोट हैं। 1.60 लाख में से बसपा प्रत्याशी हाजी अलीम को 88148 वोट मिल पाए।
बता दें स्याना, अनूपशहर, डिबाई, शिकारपुर और खुर्जा में भी दलित मुस्लिम वोट सवा लाख से कम नहीं है। इसके बावजूद बसपा को किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई।