मार्च से शुरू होंगे जिग-जैग ईंट भट्ठे, निर्माण कार्य की बढ़ेगी रफ्तार
बुलंदशहर। एक मार्च से ईंट-भट्ठों में फुंकाई का कार्य शुरू हो जाएगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने दिल्ली-एनसीआर के जिगजैग हो चुके भट्ठों के संचालन को मंजूरी दे दी है। एनजीटी के आदेश पर जिले में 400 के सापेक्ष जिग-जैग हो चुके 200 भट्ठों का संचालन जून माह तक किया जाएगा। इससे संचालकों को काफी राहत मिलेगी। नई ईंटों की निकासी से निर्माण कार्य में भी रफ्तार आएगी।
जिलेभर में करीब 400 ईंट भट्ठे संचालित हैं। बुलंदशहर जनपद प्रदेश के उन नॉन-अटेनमेंट शहरों में है, जहां पिछले कुछ वर्षों से एयर क्वालिटी इंडेक्स मानक से अधिक चल रहा है। प्रदूषण की समस्या होने पर दो वर्ष पूर्व एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) ने आदेश जारी किया, कि जिग-जैग प्रणाली अपनाकर ही भट्ठों में आग छोड़ी जाएगी, अन्यथा भट्ठा बंद रहेगा। इस आदेश के बाद जिलेभर के करीब 200 ईंट भट्ठों पर संचालकों द्वारा लाखों रुपये खर्च कर जिग-जैग सिस्टम अपनाया गया। इसके बाद एनजीटी ने प्रदूषण की समस्या बढ़ने पर गत वर्ष दिल्ली-एनसीआर के सभी भट्ठों को बंदी का फरमान सुना दिया। ऐसे में लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी भट्ठों का संचालन न होने से भट्ठा स्वामियों को प्रत्येक माह बिना कार्य के मजदूरों को वेतन देना पड़ रहा था। गत वर्ष कोरोना काल और एनजीटी के आदेश पर ईट भट्ठों का संचालन बंद चल रहा था। जिन्हें संचालित करवाने के लिए भट्ठा संचालकों द्वारा मांग की गई। अब एनजीटी द्वारा जिग-जैग तकनीक में परिवर्तित हो चुके भट्ठों का संचालन करने को कहा गया है। बिना जिग-जैग भट्ठों का संचालन करने पर ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह है जिग-जैग तकनीक
प्रदूषण विभाग के जेई संतोष कुमार ने बताया कि जिग-जैग तकनीक के द्वारा धूल कणों को हवा में जाने से रोका जाता है। इस तकनीक में भट्ठों की चिमनी को जिग-जैग आकार में बनाया जाता है। जिससे धूल कण टकराकर नीचे रह जाते हैं और हवा में नहीं जाते।
डूबने की कगार पर था भट्ठा व्यवसाय
जनपद ईंट निर्माता समिति के सचिव अनिल गर्ग ने बताया कि एक जमाना था, जब भट्ठा संचालन से मुनाफा होता था। लेबर कई माह से बैठकर पैसा ले रही है। जब पैसा ज्यादा चढ़ जाता है तो फिर प्रशासन से झूठी शिकायतें कर व्यवसायियों को परेशान किया जाता है। जिग-जैग में लाखों खर्च हुए और गत माह हुई बारिश ने कच्ची ईंटों के स्टाक गला दिए। इससे भी भट्ठा व्यवसाय को जिले में करोड़ों का नुकसान हुआ। अब एनजीटी द्वारा जिग- जैग हो चुके भट्ठों का संचालन करने की अनुमति जारी की है। जिससे काफी राहत मिलेगी।
एक नजर
400 - भट्ठे हैं जिले में
200 - जिग-जैग भट्ठे
60 से 70 - श्रमिक एक भट्ठे पर
6 लाख खर्च आता है इस प्रणाली पर
एनजीटी के आदेश पर ही एक मार्च से जिग-जैग हो चुके भट्ठों में फुंकाई का कार्य शुरू करने के आदेश प्राप्त हो चुके हैं। एक मार्च से जून माह तक केवल जिग-जैग भट्ठों का संचालन किया जाएगा। बिना जिग-जैग भट्ठों में फुंकाई शुरू करने का आदेश मिलने पर संचालन शुरू करवा दिया जाएगा। फिलहाल बंदी के आदेश तक फुंकाई नहीं होगी। फुंकाई करने वाले भट्ठा संचालक पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष चौहान, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड