शहर को अभी जाम के झाम से निजात नहीं मिलने वाली है। पार्किंग नही होने से शहर में सड़कों के किनारे जहां-तहां वाहन पार्क कर दिए जाते है। इनके कारण अक्सर जाम लगता रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए कमिश्नर ने पार्किंग प्रोजेक्ट तैयार किया था।
लेकिन अब कमिश्नर के मेगा पार्किंग प्रोजेक्ट पर फंडिंग का ब्रेक लग गया है। कमिश्नर 700 वाहन क्षमता वाली पार्किंग की प्लानिंग तो कर गए, लेकिन फंडिंग का रास्ता नहीं सुझाया। ऐसे में जिला प्रशासन और बुलंदशहर विकास प्राधिकरण के अधिकारी फंडिंग को लेकर पेशोपेश में हैं।
बोर्ड की मीटिंग में मंडलायुक्त के सामने पुरानी जेल की जमीन के इस्तेमाल करने और शहर को जाम से मुक्त कराने का प्रस्ताव रखा गया था। मंडलायुक्त ने पुरानी जेल के कुछ हिस्से में 700 वाहन क्षमता वाली पार्किंग का सुझाव दिया और प्लानिंग का आदेश दे दिया।
पार्किंग के ऊपर करीब 1000 मीटर में ग्रीन पार्क विकसित करना था, ताकि शहर के लोगों को घूमने के लिए इको फ्रेंडली माहौल मिल सके। इसके साथ ही शहर में वाहनोें को सड़कों के किनारे खड़ा करना ना पड़े, जिससे जाम की परेशानी कम हो सके।
प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये का खर्च आना है। सवाल यह है कि रुपयों का इंतजाम कहां से होगा। प्राधिकरण के पास इतने सोर्स नहीं है कि वह करोड़ों रुपये पार्किंग और ग्रीन पार्क पर खर्च कर दें। फंडिंग का रास्ता नहीं निकलने पर पार्किंग एवं ग्रीन पार्क की
प्लानिंग फाइलों में है। बता दें योजना आम आदमी के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे न सिर्फ शहर में जाम की समस्या का खातमा हो जाता, बल्कि आम आदमी को घूमने के लिए ग्रीन पार्क की सौगात मिलती।