बुलंदशहर। मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज की समय से ब्लड न मिलने पर रविवार शाम मौत हो गई। मृतक के पुत्र ने ब्लड बैंक कर्मियों पर रुपये लेकर ब्लड देने का आरोप लगाया। समाचार प्रकाशित होने पर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने मामले में जांच बैठा दी है। ब्लड बैंक कर्मियों का कहना है कि बुजुर्ग के लिए निशुल्क ब्लड दिया गया था।
जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव रौंडा निवासी 86 वर्षीय नत्थी की रविवार शाम मेडिकल कॉलेज के नए भवन के चतुर्थ तल पर बने वार्ड में मौत हो गई। जो हीमोग्लोबिन कम होने पर समय से ब्लड न चढ़वाने के कारण होना सामने आया है। मृतक के पुत्र पुष्पेंद्र ने ब्लड बैंक कर्मियों पर रुपये देकर ब्लड देने और बाद में वापस न करने का आरोप लगाया।
मंगलवार को समाचार प्रकाशित होने पर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने संज्ञान में लेकर जांच के निर्देश दिए हैं। इस मामले में ब्लड बैंक में तैनात कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। ब्लड बैंक कर्मियों का कहना है कि मृतक के लिए डोनर मिलने के बाद ब्लड उपलब्ध करा दिया गया था।
इसके लिए परिजनों से कोई शुल्क नहीं लिया गया। परिजन ब्लड लेने के दो घंटे बाद उसे वापस करने आए थे। जो नहीं लिया गया। वहीं, मृतक के परिजनों ने अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी है।
जिला चिकित्सालय के प्रभारी सीएमएस डॉ. प्रदीप राणा ने बताया कि ब्लड बैंक से चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को निशुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। जरूरतमंद को बिना डोनर के भी ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। निजी चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों के लिए ब्लड मांगने पर 1050 रुपये प्रति यूनिट शुल्क निर्धारित है।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धीर सिंह का कहना है कि मामले में ब्लड बैंक कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। परिजनों ने भी कोई लिखित में शिकायत नहीं दी है।