काली नदी गांव के साथ ही शहरी इलाकों की भी ‘लाइफलाइन’ बिगाड़ रही है। इसके प्रदूषण बढ़कर शहर की 12 कालोनियों तक पहुंच गया है। काली नदी से सटी कालोनियोें में पीने का पानी दूषित हो चुका है। गुलावठी के गांव उस्तरा में तो दो लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है, जबकि गंभीर हालात में चार मौत से जूझ रहे हैं। जानलेवा कैंसर का कारण काली नदी में बह रहे जहरीले पानी को माना जा रहा है। इतना सब कुछ होने के बावजूद सरकारी मशीनरी एहतियाती कदम तक उठाने को तैयार नहीं है। शिकारपुर के गांव आंचरू कला में दूषित पानी से चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई गंभीर रोगों की चपेट में हैं।
गुलावठी-सैदपुर मार्ग स्थित गांव उस्तरा निवासी वृद्ध महावीर सिंह को कैंसर है। महावीर वह बताते हैं कि गांव के निकट से गुजर रही काली नदी के कारण पूरे गांव का पानी दूषित हो चुका है। पानी की जांच नहीं की जाती है। यदि सैंपल लिया जाए तो इसमें घातक रसायन मिलेंगे। पानी इस हद तक दूषित हो चुका है कि कई पशुओं की भी जान जा चुकी है। सुनील (30) पुत्र राजवीर सिंह, सुखपाल (70) की मौत कैंसर से हुई है। वीर सिंह, फतह सिंह और महावीर सिंह कैंसर की चपेट में हैं।
ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन को कई बार हालात की गंभीरता से अवगत कराया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वहीं, काली नदी किनारे बसे गांव आंचरू कलां में पिछले पांच साल में कैंसर से चार लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले साल ठाकुर कुशलपाल सिंह की मौत कैंसर से हुई थी। दो वर्ष पहले कांती देवी पत्नी वीरपाल शर्मा की कैंसर से मौत हो चुकी है। वहीं, छह वर्ष पूर्व कांती देवी के पति वीरपाल शर्मा के अलावा रोशन लाल शर्मा की मौत कैंसर से हुई थी। काली नदी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे खतरनाक रासायनिक तत्व पाए गए हैं।
शहर में काली बरपा रही कहर
काली नदी के दूषित पानी की जद में शहर की करीब 12 कालोनियां है। इन कालोनियां का पानी दूषित हो चुका है। शहर की ज्ञानलोक, आवास विकास प्रथम का कुछ भाग, बाईपास रोड, नई बस्ती धमैड़ा रोड, फैसलाबाद, ऊपरकोट का नीचला हिस्सा, देवीपुरा, मोहनकुटी और रमपुरा का पानी दूषित हो चुका है।
शहरी इलाकों में समय समय पर पानी की जांच कराई जाती है। जल्द ही फिर से सैपलिंग कराकर दूषित पेयजल का प्रयोग बंद कराया जाएगा। लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। दूषित पानी वाले क्षेत्रों में पालिका की वाटर सप्लाई बढ़ाई जाएगी।
एके सिंह
इओ बुलंदशहर
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आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे रासायनिक तत्वों वाले पानी से किडनी, लीवर, फेफड़े आदि शरीर के संवेदनशील अंग कैंसर की चपेट में आ जाते हैं। हड्डी और दांत खराब होने लगते हैं। आंत और गले को भी इससे बड़ा नुकसान पहुंचता है। नाखून नीले हो जाते हैं। त्वचा भी खराब होने लगती है। कुल मिलाकर दोनों रासायनिक तत्व शरीर को खोखला बना देते हैं। - दीपक ओहरी, सीएमओ, बुलंदशहर