अहमदगढ़। बच्चों को स्कूल छोड़कर घर आ रहे भाजपा नेता रामवीर कश्यप (55) की शुक्रवार के ढकनगला गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने के बाद बाइक सवार हमलावर फरार हो गए। हमलावरों को पकड़ने के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले में ग्राम प्रधान समेत पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
मीणों ने बताया कि भाजपा नेता व पूर्व प्रधान रामवीर कश्यप प्रदेश के मंत्री नरेंद्र कश्यप के करीबी रहे हैं। वह बाइक से पौत्री माधवी और जान्ह्वी को स्कूल छोड़ने गए थे। घर लौटते समय रास्ते में खड़े बाइक सवार तीन बदमाशों ने लात मारकर उनकी बाइक गिरा दी। इसके बाद ताबड़तोड़ गोली बरसा दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। चेहरे, कनपटी और पैर में गोली लगी है। पेट के साइड में एक चाकू से वार का निशान भी मिला है। गोली चलने की आवाज पर खेतों में चारा काट रहे किसान मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे।
रामवीर कश्यप वर्ष 2005 से 2010 तक गांव डोमला हसनगढ़ के ग्राम प्रधान रहे हैं। ढकनगला भी डोमला हसनगढ़ का ही मजरा है। रामवीर की हत्या की सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। एसएसपी श्लोक कुमार, एसपी देहात रोहित मिश्र समेत अन्य अधिकारी भी पहुंच गए। रामवीर के बेटे नरेंद्र कुमार ने गांव के प्रधान ऋषिपाल सिंह, सोनू, रवींद्र, पप्पू व दिनेश के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में ग्रामीणों के साथ स्कूल के बच्चों से भी पूछताछ की है।
एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि मामले में आरोपी बनाए गए डोमला हसनगढ़ के वर्तमान ग्राम प्रधान ऋषिपाल सिंह व दिनेश दिल्ली में अवैध हथियार के साथ पकड़े गए थे। तभी से दोनों तिहाड़ जेल में बंद हैं। ग्राम प्रधान पक्ष को शक था कि रामवीर कश्यप ने ही उनकी मुखबिरी करके दिल्ली में पकड़वाया था। वर्ष 2012 में भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसका वाद अभी भी कोर्ट में लंबित है।
नरेंद्र कश्यप के रहे थे प्रतिनिधि
रामवीर कश्यप प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप के करीबी थी। ग्रामीणों ने बताया कि रामवीर कश्यप वर्ष 2005 में बसपा के मेरठ मंडल के कोऑर्डिनेटर भी रहे हैं। वर्ष 2010 में नरेंद्र कश्यप के राज्यसभा सांसद बनने पर उनके अधिकृत प्रतिनिधि भी बनाए गए थे। नरेंद्र कश्यप के भाजपा में शामिल होने के बाद रामवीर कश्यप भी बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।
हमलावर तीन दिन से कर रहे थे पीछा
बदमाशों को पता था कि रामवीर प्रतिदिन अपनी पौत्री को स्कूल छोड़ने के लिए जाते हैं। स्कूल के बच्चों के मुताबिक बाइक पर तीन युवक पिछले तीन दिन से स्कूल के पास दिखाई दे रहे थे। पिछले दो दिन से रामवीर बच्चियों को छोड़ने के लिए नहीं जा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार को वह किसी काम से दिल्ली चले गए थे, जबकि बृहस्पतिवार को गांव में ही एक गमी में शामिल होने के लिए गए थे। शुक्रवार के वह स्कूल गए तो बदमाशों ने हमला बोल दिया।
कोट
पूर्व प्रधान रामवीर की हत्या के बाद ग्रामीणों और स्कूल के बच्चों से बात की गई है। कुछ साक्ष्य और अहम जानकारी मिली है। हत्या के खुलासे के लिए छह टीम लगाई गई हैं। शिकायत के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। - श्लोक कुमार, एसएसपी