आतंकियों से लड़ते शहीद हुए नीरज कुमार का परिवार आज भी राज्य सरकार की आर्थिक मदद के इंतजार में है। अब गृहसचिव ने जिला प्रशासन ने तत्काल सरकारी गजट लखनऊ भेजने को कहा है। अफसरों की लापरवाही के चलते परिवार की इस उपेक्षा को गंभीर माना जा रहा है। अब 15 अगस्त तक सरकारी मदद मिलने की उम्मीद है।
2014 में आतंकियों से मुठभेड़ में बुलंदशहर के जॉबाज जवान नीरज कुमार शहीद हो गए थे। नीरज शिकारपुर तहसील क्षेत्र के गांव देवराला के रहने वाले थे। शहादत के बाद नीरज के पराक्रम की दास्तां सुनकर भारत सरकार ने मरणोपरांत उनके लिए अशोक चक्र की घोषणा की।
गत वर्ष गणतंत्र दिवस पर शहीद नीरज की पत्नी परमेश्वरी देवी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अशोक चक्र और गजट सौंपा। नियमानुसार गजट जारी होते ही राज्य सरकार को आर्थिक मदद शहीद के परिवार तक पहुंचानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आर्थिक मदद की फाइल डेढ़ साल से हाकिमों की टेबिल पर पटखनी खा रही है। नतीजतन, डेढ़ बरस बाद भी शहीद के परिवार को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक मदद नहीं मिली है। अब स्वतंत्रता दिवस नजदीक हैं। इसलिए गृह मंत्रालय से गृह सचिव का फोन एडीएम प्रशासन अरविंद कुमार मिश्र के पास पहुंचा।
सचिव ने एडीएम को 90 मिनट का समय देते हुए शहीद नीरज के गजट की कॉपी लखनऊ भिजवाने का आदेश दिया, ताकि नीरज के परिवार को स्वतंत्रता दिवस पर आर्थिक मदद दी जा सके। सैनिक कल्याण अधिकरी जीके जौहरी ने बताया कि अशोक चक्र विजेता के परिवार को राज्य सरकार 25 लाख रुपये देती है। गौरतलब है कि अब तक देश के लिए शहीद हुए नीरज के परिजनोें को 25 लाख रुपये नहीं मिले हैं।
अशोक चक्र की राशि राज्य सरकार से नहीं मिली है। कई बार शासन प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी परिवार की आर्थिक मदद नहीं की गई। - परमेश्वरी देवी , शहीद नीरज की पत्नी
गृह मंत्रालय को शहीद नीरज को मिले अशोक चक्र का गजट भेज दिया गया है। प्रावधान के तहत मिलने वाली मदद शहीद के परिवार को जल्द दी जाएगी। - अरविंद कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन, बुलंदशहर