निजी अस्पतालों में नहीं होगा गर्भवतियों का कैशलेस इलाज
बुलंदशहर। आयुष्मान जन आरोग्य योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में अब गर्भवती महिलाओं का कैशलेस इलाज नहीं होगा। जिले में योजना से 24 निजी अस्पताल जुड़े हुए हैं, इनमें 20 अस्पतालों में प्रसव की सुविधा है। सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने और सीजेरियन प्रसव को कम करने के लिए निजी अस्पतालों पर रोक लगाई गई है। सरकारी चिकित्सालयों में गोल्डन कार्ड धारकों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी।
आयुष्मान योजना के तहत पात्र गोल्डन कार्ड धारक परिवार को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का इलाज निशुल्क मिलता है। इसमें गंभीर रोगियों के इलाज के अलावा प्रसव की सुविधा भी शामिल है। जिले मे आयुष्मान योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव के साथ ऑपरेशन की सुविधा भी है। निजी अस्पतालों में योजना के तहत ऑपरेशन से ही अधिकांश प्रसव कराए जा रहे हैं, सामान्य प्रसव की संख्या नाममात्र थी। इस कारण आयुष्मान योजना का काम देखने वाली फर्म साचीज ने गर्भवती महिलाओं के इलाज और प्रसव पर रोक लगा दी है। अब योजना के तहत केवल सरकारी चिकित्सालयों में ही गर्भवती महिलाओं का सीजेरियन प्रसव कराया जा सकेगा।
जिले में 39,099 लोग करवा चुके इलाज
आयुष्मान योजना के जिला सूचना प्रबंधक सचिन भारद्वाज ने बताया कि जिले में अभी तक करीब तीन लाख 50 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। 39,099 लोग उपचार करवा चुके हैं। गर्भवती महिलाओं के इलाज पर रोक साचीज ने लगाई गई है। जल्द ही इस सेवा के बहाल होने की उम्मीद है।
निजी अस्पतालों में इलाज न होने से होगी परेशानी
आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के इलाज पर रोक लगाए जाने से गर्भवती महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार कई बार गर्भवती महिला की ऐसी स्थिति बन जाती है कि उसे प्रसव पीड़ा होने पर तीमारदार सीधे निजी अस्पताल लेकर पहुंच जाते हैं। चिकित्सक गर्भवती की हालत देखकर ऑपरेशन करने के लिए कह देते हैं। ऐसे में इस तरह की महिलाओं को निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना का कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा।
निजी अस्पतालों में लगातार मोटी कमाई के चक्कर में सीजेरियन प्रसव की शिकायतें मिलती रहती हैं। साचीज ने इसे संज्ञान में लेकर रोक लगा दी है। इस बारे में आयुष्मान योजना से संबद्ध निजी अस्पताल संचालकों को अवगत करा दिया गया है। - डॉ. गौरव सक्सेना, नोडल अधिकारी