सरकारी मशीनरी की लुंजपुंज व्यवस्था के चलते जनपद में क्रय केंद्राें की स्थापना अब तक नहीं हो पाई है। उधर, अनाज मंडियों में नए गेहूं की आवक शुरू हो गई है। मंडियों में नए गेहूं के दाम 1440 रुपये से 1450 रुपये तक हैं। बता दें कि सरकारी क्रय केंद्रों पर एक अप्रैल से गेहूं खरीदा जाना था।
जनपद में अप्रैल को 88 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू होनी थी। खराब सरकारी व्यवस्था के चलते अब तक न तो क्रय केंद्र ही वजूद में आए हैं और न ही गेहूं की खरीद हो पाई है। विभागीय अधिकारी कह रहे हैं कि गेहूं की थ्रेसिंग शुरू नहीं हुई है, जबकि मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो गई है।
सवाल यह है कि जब थ्रेसिंग ही नहीं शुरू हुई तो नया गेहूं मंडियों में कैसे पहुंच गया। अनाज मंडी में सतीश ने 14 क्विंटल गेहूं 1450 रुपये के हिसाब से आढ़ती को बेचा। इसी प्रकार सुरेश और महबूब मंडी में गेहूं बेचने पहुंचे।
बता दें कि गेहूं का समर्थन मूल्य 1525 रुपये है। इस हिसाब से किसानों को मंडियों में एक क्विंटल गेहूं पर कम से कम 75 से 85 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। आढ़तियों को नही दिया गया लाइसेंस ः एक तो क्रय केंद्र नहीं खोले गए हैं दूसरी ओर शासन की व्यवस्था के तहत आढ़तियों को कमीशन पर गेहूं खरीदने को लाइसेंस जारी नहीं किए गए हैं।
आढ़तियों को लाइसेंस जारी कर दिए गए होते तो किसानों को घाटा नहीं उठाना पड़ता।
उदासीन बना हुआ है सिस्टम
गेहूं खरीद को लेकर सरकारी सिस्टम पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। बोरी बारदाने की व्यवस्था नहीं की गई है। इलेक्ट्रिक कांटे भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। ऐसे में सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है।