बुलंदशहर/डिबाई। मदनपुर गैंगरेप कांड के बाद अदालत ने सोमवार को नौ वर्षीय बच्ची से रेप और उसकी हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी युवक को फांसी की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को साढ़े तीन साल बाद न्याय मिला। वहीं, दोषी युवक के परिजनों में मायूसी छा गई।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (क्राइम) रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि डिबाई थाना क्षेत्र के एक गांव में 12 फरवरी 2011 को सहेली के साथ खेत पर गाय चराने गई नौ वर्षीय बच्ची घर नहीं लौटी। काफी खोजबीन की गई, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। 14 फरवरी की सुबह उसकी लाश लहूलुहान हालत में एक खेत में मिली। पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। तत्कालीन एसओ रविंद्र कुमार सिंह ने विवेचना के दौरान गांव के नेमपाल पुत्र परम सिंह को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया कि मामला सुनवाई के लिए अपर सत्र न्यायाधीश कामिनी पाठक के न्यायालय में आया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाह पेश किए गए, जिसमें मृतका की सहेली भी शामिल रही। अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस को सुना। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने सामाजिक अपराध बताते हुए मृत्युदंड की सजा की मांग की जबकि अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता ने कम से कम सजा की मांग की। कोर्ट ने नेमपाल को दोषी मानते हुए बलात्कार के लिए उसे आजीवन कारावास और हत्या के लिए फांसी की सजा के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
चार दिन बाद होनी थी आरोपी की शादी
वादी पक्ष के अधिवक्ता रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि नेमपाल छह भाइयों में सबसे छोटा है। जिस दिन उसने यह वारदात की थी, उससे चार दिन बाद ही उसकी शादी होनी थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन पुलिस के शक के दायरे में आने के बाद शादी की खुशी काफूर हो गई। उसने अपने बयान में चार दिन बाद शादी होने की बात कोर्ट में भी बताई। जानकारी के मुताबिक नेमपाल अनाज मंडी में पल्लेदार था। पिता परम सिंह भी पल्लेदारी करता है।