17 माह और 11 दिन में उतर गया प्रदीप का ‘ताज’
बुलंदशहर। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी, जिसे राजनीति में जिले की प्रथम कुर्सी भी कहा जाता है, बुलंदशहर में अपने स्थायी अध्यक्ष की तलाश में है। जिले की यह कुर्सी अपने वर्तमान पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान दो बार अध्यक्षों को बदलते देख चुकी है। वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रदीप चौधरी का 17 माह 11 दिन का कार्यकाल भी उतार चढ़ाव वाला रहा। बीते पांच माह के दौरान कुर्सी के इस खेल में उनकी प्रत्येक शह को विपक्षी मात देते नजर आए। आखिरकार सोमवार को हावी हुए विपक्ष ने प्रदीप के ताज को गिरा ही दिया। अब देखना यह है कि इस कुर्सी पर इस कार्यकाल का तीसरा अध्यक्ष कौन होगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के इस कार्यकाल का प्रथम अध्यक्ष जनवरी 2016 में पूर्व अध्यक्ष हरेंद्र यादव को चुना गया था। मार्च 2017 में विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा ने सत्ता हासिल की। हरेंद्र यादव ने उस दौरान सपा का दामन थामा हुआ था। भाजपा के सत्ता में आने के चार माह बाद ही हरेंद्र यादव को अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद तत्कालीन डीएम डॉ. रोशन जैकब ने जिला पंचायत का कार्यभार संभाला था। नियमानुसार अगस्त 2017 में एक बार फिर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चुनाव हुआ। इस दौरान आमने सामने थे प्रदीप चौधरी और महेंद्र भैया। चौंकाने वाली बात यह थी कि दोनों ही प्रत्याशी खुद को भाजपा समर्थित बता रहे थे। हालांकि, अगस्त में चुनाव हुआ और जिला पंचायत की बागडोर एक वोट से जीतकर प्रदीप चौधरी ने हासिल कर ली। इसमें भी सबसे बड़ी बात यह थी कि प्रदीप चौधरी पहली बार जिपं सदस्य बने और पहली बार में ही उन्हें सदस्यों ने अपना अध्यक्ष चुन लिया था। लेकिन, प्रदीप की यह डगर आसान नहीं थी। कार्यकाल को जैसे तैसे एक साल बीता और सितंबर में 33 जिपं सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने लगे। सात सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर सदस्यों के शपथ पत्रों का सत्यापन हुआ। इस बार भाजपा का समर्थन पूरी तरह से प्रदीप के साथ था। ऊहापोह की स्थिति में प्रदीप अपना ताज बचाने में कामयाब रहे। लेकिन, स्थिति अभी सुधरी नहीं थी। अध्यक्ष के खिलाफ तीन सदस्य हाईकोर्ट पहुंच गए और भाजपा का समर्थन भी उन्हें पूरा मिलता नजर नहीं आया। जिसके चलते इस बार उनकी कुर्सी छिन गई।
पहले 33 और अब 44 सदस्य हुए विरोधी
जिला पंचायत सदस्य सुनील चरौरा ने बताया कि सितंबर में जिपं अध्यक्ष के खिलाफ 33 सदस्य थे, लेकिन इस बार सोमवार को यह संख्या 44 हो गई। इस बार अध्यक्ष का जाट कार्ड भी फेल होता नजर आया। बता दें कि जो 11 सदस्य इस बार बढ़े उनमें से आठ सदस्य जाट बिरादरी से हैं। प्रदीप के अपनों ने भी उनका साथ नहीं दिया। वहीं, प्रदीप चौधरी पक्ष के जिपं सदस्य पंकज प्रधान ने बताया कि वह निवर्तमान अध्यक्ष के साथ रहे।
यह सदस्य रहे नदारद
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के दौरान खुद प्रदीप चौधरी समेत सदस्य कदीम फड्डा, अजय वाल्मीकि, रेनू चौधरी, पंकज प्रधान, शशांक भाटी, सुरेंद्र सिंह, पुष्पा देवी व ममता यादव नदारद रहे।
तो अब अगस्त में हो सकेगा चुनाव
प्रदीप अध्यक्ष के कुर्सी से हटने के बाद अब अगस्त माह में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की चर्चा हो रही है। चूंकि अभी लोकसभा चुनाव भी होने हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद ही जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर नए उम्मीदवार का चयन हो सकेगा।
दो मिनट का रखा मौन
जिला पंचायत सभागार से मतदान के बाद बाहर निकले सदस्यों ने पंचायत सभागार में बीते 14 फरवरी को पुलवामा में शहीद हुए जवानों की शहादत पर श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन धारण किया।
छह गाड़ियों में रवाना हुए सदस्य
जिपं सभागार से निकलने के बाद सभी 44 सदस्य एक-एक कर छह गाड़ियों से रवाना हो गए। इस दौरान विपक्ष के नेता महेंद्र भैया पूर्व अध्यक्ष हरेंद्र यादव के साथ सभागार से बाहर निकले।
प्रदीप के समर्थकों को पुलिस ने खदेड़ा
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रदीप चौधरी के सदस्यों के राजेबाबू पार्क में दोपहर को एकत्रित होने की सूचना पुलिस को मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सभी सदस्यों को खदेड़ दिया।
बयान
सुरक्षा को लेकर कड़े प्रबंध किए गए थे। मतदान शांतिपूर्वक संपन्न कराया गया। कहीं से भी किसी प्रकार के उपद्रव की सूचना नहीं थी। - प्रभाकर चौधरी, एसएसपी