जल्द ही मानसून दस्तक देने वाला है और अफसरों को अब नाला सफाई का काम दिखाई दे रहा है। करीब डेढ़ सप्ताह पहले नाला सफाई का टेंडर पास हुआ है। अफसर 55 लाख रुपये की लागत से बारिश से पहले शहर के नालों की सफाई का दावा कर रहे हैं, मगर धरातल पर यह होना आसान नहीं दिख रहा। पिछले वर्ष भी मानसून से पहले 54 लाख खर्च करके नाला सफाई कराई गई, फिर भी बारिश में शहर लबालब हो गया था।
नगर पालिका द्वारा नगर के नालों की सफाई के नाम पर करीब 55 लाख रुपये के टेंडर छोड़े गए हैं। मानसून आने में अब कुछ दिन ही शेष बचा है और उससे पहले यह टेंडर छोड़े जाना समझ से परे हैं। बता दें कि मौसम विशेषज्ञ 25 जून तक मानसून आने की संभावना जता चुके हैं ऐसे में लोगों का कहना है कि 10 दिनों में शहर के नाले कैसे साफ हो पाएंगे। पिछले वर्ष भी मानसून से पहले टेंडर छोड़े गए थे, लेकिन पहली बारिश ने ही पालिका अफसरों के काम की कलई खोल दी थी।
लाखों खर्च मगर गंदगी से अटे हैं नालेः नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालों की सफाई के नाम पर फिर से लाखों रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी नाला सफाई का काम मानसून से पहले मुश्किल ही लग रहा है।
कागजों में होती है नालों की सफाईः नगर पालिका द्वारा नालों की सफाई पर हर वर्ष करीब 50 से 60 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। दावा किया जाता है कि नाला सफाई के बाद मानसून के समय नगर में गंदे पानी का भराव नहीं होगा। नालों की सफाई के बाद पानी जमा नहीं होगा, लेकिन पिछले पांच साल से यह दावे सिर्फ दावे ही नजर आ रहे हैं।
पिछले वर्ष पालिका ने करीब 54 लाख रुपये खर्च करके नालों की सफाई कराई थी, लेकिन मानसून ने पालिका द्वारा कराए गए नाला सफाई कार्य की पोल खोल दी थी।