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कार सवार दंपती का कारनामा: टीका लगाने का झांसा देकर 40 दिन के बच्चे का अपहरण, दिव्यांग हैं मासूम के माता-पिता

Mon, 05 Jul 2021 09:52 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अनूपशहर (बुलंदशहर)

सार

गांव डूंगरा जोगी निवासी संजय शर्मा उर्फ संजीव पुत्र निरंजन लाल शर्मा ने तहरीर देकर बताया कि करीब 40 दिन पूर्व ही उनकी पत्नी ने बुलंदशहर के एक निजी अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया था। जिसके बाद वह जच्चा-बच्चा को लेकर गांव आ गए थे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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गांव डूंगरा जोगी से सोमवार दोपहर कार सवार एक महिला व एक व्यक्ति ने 40 दिन के मासूम बच्चे का टीकाकरण करने के नाम पर अपहरण कर लिया। आरोपियों ने मासूम के दादा को घर से रूई लाने के लिए भेजा और वृद्ध के लौटने से पूर्व ही आरोपी मौके से मासूम को अपने साथ अगवा कर ले गए।

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स्विफ्ट कार से आई आरोपी महिला ने लगा रखा था चश्मा 
गांव डूंगरा जोगी निवासी संजय शर्मा उर्फ संजीव पुत्र निरंजन लाल शर्मा ने तहरीर देकर बताया कि करीब 40 दिन पूर्व ही उनकी पत्नी ने बुलंदशहर के एक निजी अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया था। जिसके बाद वह जच्चा-बच्चा को लेकर गांव आ गए थे। बताया कि सोमवार दोपहर करीब पौने दो बजे एक स्विफ्ट कार गांव के बाहर मुख्य सड़क पर आकर रुकी। जिसमें से एक महिला मुंह पर कपड़ा बांधे हुए और आंखों पर चश्मा लगाए हुए उनके घर पहुंची। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बता टीका लगाने की कही बात 
आरोपी महिला ने खुद को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बताया और बच्चे का टीकाकरण करने की बात कही। जिसके बाद संजय के पिता निरंजन अपने 40 दिन के मासूम पौत्र को गोद में लेकर आरोपियों की कार तक पहुंचे। जहां टीकाकरण करने से पूर्व आरोपी महिला ने कहा कि उनके पास रुई खत्म हो गई है और निरंजन को घर से रूई लाने के लिए भेज दिया और मासूम को अपने पास ही रख लिया। निरंजन जब तक रूई लेकर वापस लौटे तब तक आरोपी महिला व उसका साथी मासूम को कार से लेकर भाग निकले थे।
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सूचना पर हरकत में आई पुलिस 
मामले की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। जानकारी मिलते ही एसपी देहात, सीओ डिबाई, थाना प्रभारी अनूपशहर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच पड़ताल शुरू कर दी। लेकिन, अभी तक मासूम का कोई सुराग नहीं लग सका है और न ही आरोपियों का कोई पता लगाया जा सका है। 

कार का नंबर यूपी-14 से शुरू, बताया लगी थी पीली प्लेट
परिजनों का कहना है कार का शुरूआती नंबर यूपी-14 था। जिससे साफ है कि आरोपियों के द्वारा लाई गई कार गाजियाबाद नंबर की थी। परिजन उसके अन्य नंबरों को नोट नहीं कर सके। क्योंकि, उन्हें यकीन था कि आरोपी महिला आंगनबाड़ी से ही आई थी। 

दिव्यांग हैं मासूम के पिता और मां
अपहृत मासूम की मां और पिता शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। बताया गया कि इसी कारण संजय और उनकी पत्नी सुधा घर से खुद मासूम को लेकर आरोपियों की कार तक नहीं जा सके थे। संजय के पिता निरंजन मासूम को लेकर टीकाकरण के झांसे में आरोपियों को उसे सौंप आए थे। 

सीसीटीवी खंगाले जा रहे, फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
मामले की जानकारी मिलते ही फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गई और मौके से साक्ष्य जुटाने की कोशिश की है। साथ ही पुलिस गांव से विभिन्न रास्तों पर लगे सीसीटीवी भी चेक कर रही है। हालांकि, अभी तक पुलिस को कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है। 

मामले में पांच टीमों का गठन कर लगाया गया है। गाड़ी का नंबर यूपी-14 यानी गाजियाबाद नंबर की स्विफ्ट कार बताई जा रही है। सभी टीमों को विभिन्न पहलुओं के आधार पर जांच पर लगाया गया है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर मासूम को बरामद कर लिया जाएगा। - हरेंद्र कुमार, एसपी देहात

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