कुत्तों को पकड़वाने के लिए स्थानीय वार्ड सदस्य से भी कहा गया मगर, कोई सुनवाई नहीं हुई। इसको लेकर कई बार अभिभावकों ने शिकायत की। ऐसे में सुबह और दोपहर को एक कर्मचारी को बैठाया जाता है। इसके बावजूद कुछ कुत्ते गांव के रास्ते में बच्चों का काट लेते हैं। इसमें संबंधित विभाग को ध्यान देना चाहिए। कुत्ते के हमले से शिकार हुए बच्चों में दामिनी, नेहा, सलोनी, निखिल, गुलशन, फुलवा, परी, अभय, प्रीत, प्रतिज्ञा, कृष्णा, उर्वशी, चंद्रभाष, रुमान, आदित्य, तोशिका, सालवी, जयंत और माधव हैं। वहीं कुछ बच्चे कुत्तों से बचने के चलते चोटिल भी हो गए हैं।
वहीं, स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा चार की दामिनी का कहना है कि उसको पता ही नहीं कि कुत्ते ने कब काटा है। इसके अलावा कक्षा एक की नेहा को भी कुत्ते के काटे जाने की जानकारी नहीं है।
इस संबंध में जानकारी मिली है। कुत्तों को पकड़वाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में वन विभाग को भी अवगत कराया गया है। - भूपेंद्र प्रताप सिंह, ईओ नगर पंचायत पहासू