ई-टेंडर में अटके राशन की जीपीएस से होगी निगरानी
बुलंदशहर। राशन की कालाबाजारी व धांधली रोकने के लिए शासन ने काफी समय पहले राशन का आदान-प्रदान करने वाले वाहनों में जीपीएस लगाने के निर्देश दिए थे। काफी समय बाद भी इसकी शुरूआत नहीं की गई। अफसरों का कहना है कि नया टेंडर होने के बाद ही जल्द वाहनों में जीपीएस लगाकर राशन का आदान-प्रदान किया जाएगा।
जिले में फूड सिक्योरिटी योजना की शुरूआत जनवरी 2016 को शुरू हुई थी। योजना से जुड़े 6.50 लाख परिवारोें को प्रत्येक माह प्रति सदस्य पांच किलो राशन प्रदान किया जाता है। इसमें गेहूं दो रुपये और चावल तीन रुपये प्रति किलो देने का प्रावधान है। प्रत्येक माह लगभग 32 लाख किलो राशन का वितरण होता है। यह राशन एफसीआई आदि सरकारी गोदामों से उठाकर पहले क्षेत्रवार बने गोदामों में पहुंचाया जाता है। उसके बाद राशन की 1426 दुकानों पर सप्लाई होती है। इस कार्य की जिम्मेदारी खाद्य एवं विपणन विभाग की होती है। जब से यह योजना शुरू हुई तब से लेकर अब तक कालाबाजारी और धांधली आदि के मामले सामने आते रहे हैं। काफी समय पहले शासन ने इस पर शिकंजा कसने के लिए उन वाहनों में जीपीएस लगाने के निर्देश दिए थे, जो राशन का आदान-प्रदान करते हैं। काफी समय होने के बाद भी अभी तक वाहनों में जीपीएस नहीं लगे। खाद्य एवं विपणन अधिकारी अविनाश चंद्र सागरवाल का कहना है कि राशन का नया ई-टेंडर नहीं होने के कारण वाहनों में जीपीएस नहीं लग सके। 19 नवंबर को राशन का नया ई-टेंडर जारी होगा। टेंडर लेने वाली फर्म से राशन का आदान-प्रदान करने वाले वाहनों में जीपीएस लगवाने के लिए भी लिखित में लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि राशन का आदान-प्रदान करने वाले वाहनों में ई-टेंडर होने के बाद शुरूआत करवा दी जाएगी।