दिवाली के बाद जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी, शासन और जिला प्रशासन के आदेश के बाद जिलेभर में खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है। इससे जिले की हवा जहरीली होती जा रही है। एक्यूआई अधिक होने से बुलंदशहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गया है। शनिवार को बुलंदशहर का एक्यूआई 440 और पीएम 2.5 करीब 380 मापा गया। इसके बावजूद अफसर और लोग इसमें सुधार लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
दिवाली की आतिशबाजी और लगातार कूड़ा और पराली जलाने के धुंए से वातावरण में प्रदूषण का स्तर घटने की जगह लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के साथ बुलंदशहर का एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया। इससे सुबह के समय आसमान में स्मॉग की चादर फैली रही। ऐसी ही स्थिति नोएडा और हापुड़ की भी रहीं, सूचकांक में गिरावट होने के बावजूद स्थिति अभी भी खतरनाक बनी हुई है।
वातावरण में सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ना, पर्यावरण को ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी काफी नुकसानदेह है। क्योंकि दोनों ही गैसों की अधिकता वातावरण को नुकसान पहुंचाती है। इस दौरान लोगों को सांस लेने में परेशानी होने के साथ आंखों में जलन होने के साथ संक्रमण का खतरा बना रहता है।
सांस के रोगी करें बचाव
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि स्मॉग के कारण सांस के मरीजों की परेशानी काफी बढ़ जाती है। कूड़ा जलाने के कारण वायु में प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है और छोटे-छोटे कण सांस के साथ अंदर चले जाते हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। सांस के मरीजों को कपड़ा से मुंह ढककर रहना चाहिए।