शौचालय के सर्वे में 308 गांव ‘फेल’
बुलंदशहर। जिले में हुए सर्वे ने शौचालयों की पोल खोल दी है। विभाग द्वारा ओडीएफ किए गए गांव में से 308 गांव ऐसे निकले हैं, जहां शतप्रतिशत शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ है। स्वयं जिला पंचायत राज विभाग ने इसका खुलासा किया है। अब 15 अक्तूबर तक हर हाल में इन गांव को ओडीएफ करने का लक्ष्य है।
केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनाकर जिले को खुले में शौच से मुक्त करने की योजना वर्ष 2014 में शुरू हुई। उस समय 2.65 लाख परिवारों को शौचालय के चिन्हित किया गया था। वर्ष 2016 से जिले के गांवों को ओडीएफ की श्रेणी में भी शामिल करना शुरू कर दिया गया था। समय-समय पर विभागीय अफसर लगातार गांवों में शौचालय बनाकर ओडीएफ घोषित करते रहे। पिछले दिनों शासन ने जिले को दो अक्टूबर तक ओडीएफ करने के निर्देश दिए थे। इस दौरान भी संबंधित अफसर दावा करते रहे कि निश्चित तिथि तक जिले में शतप्रतिशत शौचालय बनाकर ओडीएफ कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और गनीमत यह रही कि शासन से ओडीएफ के लिए समय मिल गया। इससे अफसरों ने तो राहत ली, लेकिन साथ ही शासन के आदेश पर ओडीएफ हो चुके गांवों में बने शौचालयाें का सर्वे शुरू हुआ तो ओडीएफ की पोल खुलकर सामने आ गई। जिला पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिला प्रशासन ने अब जिले के 1176 राजस्व गांव में से 1007 को ओडीएफ घोषित किया था। शासन के आदेश पर अब तक 776 गांवों के शौचालयों का सर्वे पूरा हो चुका है। इनमें से मात्र 468 गांव ही ओडीएफ मिले, जबकि 308 गांव ओडीएफ में फेल साबित हुए हैं।
अभी 10 से लेकर 100 से अधिक घरों में नहीं हैं शौचालय
जिले में शौचालय के सर्वे में जो 308 गांव ओडीएफ में फेल हुए हैं। उनमें अभी भी 10 से लेकर 100 से अधिक घरों में शौचालय नहीं हैं। इनमें लगभग सभी ऐसे घर शामिल हैं, जो शौचालय के लिए पात्र हैं। अभी तक इनका शौचालय न बनना जिला प्रशासन से लेकर ग्राम प्रधान तक बरती गई शिथिलता की भी पोल खोल रहा है।
जिले में होेता रहा है खेल, नहीं जागे अफसर
जिले को ओडीएफ करने के लिए शौचालय निर्माण में खेल होता रहा और अफसर नहीं जागे। ऐसा नहीं है कि समय-समय पर पुराने शौचालय को नया दिखाकर, अपात्रों के शौचालय बनाना और शौचालय के नाम पर अवैध वसूली जैसे आरोप की शिकायत मिलती रहीं। हालांकि इन पर जब कार्रवाई की अफसरों की नींद टूटी और कार्रवाई भी की गई। लेकिन इसके बाद या तो अधिकतर शिकायत व कार्रवाई दबा दी गई या फिर आगे ही नहीं बढ़ी। यह अलग बात रही कि कुछ शिकायतकर्ता सजग रहे तो उनमें कार्रवाई के साथ विभाग की भी किरकिरी हुई। इस कार्य में जिला प्रशासन से लेकर ग्राम प्रधान तक की लापरवाही भी सामने आई। इसके बावजूद भी कोई सुधार नहीं हुआ।
शौचालय न बनवाने वालों पर भी मेहरबानी
जिले में सैकड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्होंने शौचालय निर्माण के लिए शासन से मिला धन तो प्राप्त कर लिया। लेकिन अभी तक शौचालय नहीं बनवाया। ऐसे लोगाें पर कार्रवाई के लिए विभागीय अफसर आदेश तो जारी करते रहे। लेकिन ऐसे कुछ ही लोगों को नोटिस आदि देकर इतिश्री कर ली। अब ओडीएफ के लिए शासन से समय मिलने पर ऐसे लोगों पर अफसरों की मेहरबानी फिर होने लगी है।
जो गांव अब तक ग्राम पंचायत और जिला स्तर से ओडीएफ किए जा चुके हैं। उनमें से 308 गांव सर्वे में फेल हुए हैं। ऐसे गांवों के ग्राम प्रधानों और ग्राम सचिव को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द सभी घरों में शौचालय बनवाएं। इसके साथ ही उन पर कार्रवाई के लिए भी विचार चल रहा है। - अमरजीत सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी, बुलंदशहर।