‘मोदी जी 105 रुपये से नहीं होने वाला भला’
बुलंदशहर। केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी के बाद भी किसानों को कुछ खास राहत मिलने वाला नहीं है। किसानों का कहना है कि एक ओर उर्वरक, डीजल मूल्य और बिजली के बिल आसमान छू रहे हैं। ऐसे में 105 रुपये की बढ़ोत्तरी किसानों को कितना राहत दे पाएगी। उनका कहना है कि 105 रुपये से किसानों का भला नहीं होने वाला है।
बता दें कि विगत वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 1735 रुपये था। इस बार अब केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य में 105 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इसके चलते गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़कर 1840 रुपये हो गया है। इस बढ़े गेहूं के मूल्य को जिले के किसान स्वीकार नहीं कर रहे। उनका कहना है कि खेती करना इतनी महंगी और मेहनत वाली हो गई है कि गेहूं का समर्थन मूल्य कम से कम 2500 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने की योजना भी तभी सार्थक होगी, जब गेहूं का और मूल्य बढ़ाया जाए।
बोले किसान
खेती के लिए प्रयोग की जाने वाली उर्वरक हो या फिर बीज, डीजल और बिजली का बिल। सब इतना महंगा हो गया है कि इसे झेल पाना किसान के बस की बात नहीं रही है। किसान कर्ज के नीचे दबा हुआ है। गेहूं का समर्थन मूल्य बहुत कम है और किसान को लाभ ही देना है तो गेहूं का और रेट बढ़ाया जाए। - ओमपाल सिंह।
सबकुछ महंगा होने और मजदूरी बढ़ने के साथ किसान को फसल की लागत भी नहीं मिल रही। किसान मंडी में फसल लेकर बेचने जाता है तो सही भाव नहीं मिलता। या तो सरकार गेहूं का मूल्य और बढ़ाए या फिर महंगे उर्वरक, बीज, डीजल और बिल का बिल कम करे। - छिद्दा सिंह।
एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है। वहीं, दूसरी ओर अभी तक महंगे उर्वरक, बीज, डीजल और बिजली बिल से निजात नहीं दिला पाई है। ऐसे में सवाल यह है कि किसानों की आय कैसे दोगुनी हो पाएगी। - देवी सिंह।
जब तक सरकार किसानों की पीड़ा नहीं सुनी और समझेगी। तब तक किसान का भला नहीं होने वाला। लाठी-डंडा से भी किसान संबद्ध नहीं होगा। यदि सरकार को किसानों की दशा सुधारनी है तो पहले महंगाई पर रोक लगाए। उसके बाद गेहूं सहित सभी फसलों का लागत मूल्य के आधार पर समर्थन मूल्य जारी करें। - महेंद्र सिंह।