अब छात्रों के उत्तर से पास होंगे ‘गुरू जी’
बुलंदशहर। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद ने राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज में शिक्षा के गिरते स्तर को सुुधारने के लिए नई पहल शुरू की गई है। स्कूलों में शिक्षा की गुुणवत्ता जानने के लिए अब नोडल अफसर स्कूलों में जाकर बच्चों से सवाल-जवाब करेंगे और गुरू जी ने बच्चों को क्या पढ़ाया है, इसका आंकलन करेंगे। साथ ही इसके लिए प्रधानाचार्य और शिक्षक की जवाबदेही तय की जाएगी और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। पिछले कुछ सालों में राजकीय इंटर कॉलेज में स्मार्ट कक्षाएं संचालित हुई और ‘ग्रीन स्कूल, क्लीन स्कूल’ के तहत 50-50 लाख का बजट स्कूलों की दशा और शिक्षा सुधार पर खर्च हो रहे हैं। इन प्रयासों के बावजूद उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद को राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों के शैक्षणिक स्तर में सुधार नहीं मिल रहा। इसके पीछे की वजह को जानने के लिए परिषद की ओर से जिले में एक संयुक्त सचिव तैनात किया जाएगा। साथ ही शैक्षिक पंचांग से पढ़ाई, छात्र-छात्रओं के कौशल विकास पर हुई मेहनत के अलावा खेलकूद की गतिविधियों की पड़ताल स्कूल-कॉलेज में होगी। यहां प्रधानाचार्य और शिक्षक को छोड़ छात्र-छात्राओं से माध्यमिक शिक्षा की हकीकत को परखा जाएगा।
नोडल अधिकारी द्वारा माह में दो बार समीक्षा बैठक होगी। डीआइओएस और राजकीय कॉलेज के प्रधानाचार्यों को बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर दिशा निर्देश दिए जाएंगे। डीआइओएस से हर सप्ताह स्कूलों की प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। जिला विद्यालय निरीक्षक आरके तिवारी ने बताया कि शैक्षिक गुणवत्ता सुधार को लेकर नोडल अधिकारी द्वारा समीक्षा बैठकें की जाएंगी। माध्यमिक के राजकीय स्कूल व कॉलेज में पठन-पाठन को जांचा जाएगा।