कोर्स तो बदला, मगर पढ़ा दीं पुरानी किताबें
बुलंदशहर। परिषदीय स्कूलों में देरी से मिली किताबों का असर अर्द्धवार्षिक परीक्षा पर देखने को मिलेगा। शैक्षिक सत्र 2018-19 में बेसिक शिक्षा के बदले पाठ्यक्रम का पता शिक्षकों को स्कूल खुलने के 91 दिन बाद लगा जब उनके हाथ में नई किताबें आईं। अब ये शिक्षक असमंजस में है कि बच्चों को जो पढ़ाया वह तो आउट ऑफ कोर्स है। ऐसे में बच्चे अर्द्धवार्षिक परीक्षा में क्या लिखेंगे।
प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं की किताबों में ज्यादातर कोर्स बदल चुका है। अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू है। सितंबर खत्म होने को है, लेकिन अभी भी सभी बच्चों के पास किताबें नहीं पहुंची है। बीते दिनों जो किताबें बच्चों को मिली है, उसने शिक्षकों के साथ बच्चों और उनके अभिभावकों को चौंका दिया है, क्योंकि वो किताबें नए पाठ्यक्रम से है। कक्षा सात की अंग्रेजी की रेनबो की जगह नई रेनबो ने ली है। इसमें 15 की जगह 17 नए पाठ हैं। पिछले साल तक बच्चे जहां गद्य या कविता रेनबो में पढ़ रहे थे, वह नई पुस्तक में नहीं है। कक्षा- छह, सात और आठ में अंग्रेजी विषय में 80 फीसदी कोर्स बदला है। सामाजिक विषय, हिंदूी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, पर्यावरण, कला, गृह शिल्प और कृषि में 10 फीसदी से अधिक कोर्स बदल चुका है। बावजूद इसके पुरानी किताबों को पढ़ा बच्चों को अर्द्धवार्षिक परीक्षा में बैठाया जाएगा। प्राथमिक कक्षाओं में कक्षा पांच में गिनतारा, कक्षा चार में संस्कृत पीयूषम में 20 फीसद कोर्स बदला हुआ है। बदले कोर्स ने ऐसे में शिक्षकों को मुश्किलों में डाल दिया है। अप्रैल से 20 मई और जुलाई से अब तक बच्चों को जो पढ़ाया गया वह नई किताब में बदल चुका है। जबकि अर्द्धवार्षिक परीक्षा भी जल्द होने वाली है और अफसर इसकी तैयारियों में जुट गए हैं।
किताबों की उपलब्धता में देरी से पुरानी किताबों से कक्षाएं संचालित हुई। नई किताबों में कोर्स बदला है। अर्द्धवार्षिक परीक्षा में बच्चों को कोई दिक्कत न हो, इसे ध्यान में रखकर प्रश्न पत्र तैयार कराए जाएंगे। - अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।